सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट्स पर MDR चार्ज पर रोक से इनकार, केंद्र व RBI को नोटिस
नई दिल्ली: डिजिटल लेनदेन और यूपीआई (UPI) यूजर्स से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई (UPI) मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर कारोबारियों से MDR (Merchant Discount Rate) वसूले जाने के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI स्टीयरिंग कमेटी को कारण बताओ नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट का तीखा सवाल: “MDR टैक्स है, फीस है या कुछ और?”
यह सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ (Bench) के समक्ष हुई। वकील अंजन दत्ता द्वारा दायर जनहित याचिका में 14 दिसंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर के MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सरकार ने बिना किसी ठोस कानूनी आधार के यह शुल्क लागू करने का निर्णय लिया है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया:
“2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतानों पर कारोबारियों से वसूला जाने वाला MDR आखिर किस श्रेणी में आता है? क्या यह कोई फीस है, टैक्स है या कोई अन्य शुल्क?”
क्या है MDR का नया नियम? (15 अक्टूबर से लागू)
सरकार द्वारा हाल ही में मंजूर किए गए MDR फ्रेमवर्क के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन: यदि कोई ग्राहक किसी मर्चेंट (कारोबारी) को ₹2,000 से अधिक का यूपीआई भुगतान करता है, तो कारोबारी पर 0.4% MDR चार्ज लागू होगा।
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आम जनता के लिए पूरी तरह फ्री: ₹2,000 तक के सभी प्रकार के मर्चेंट भुगतान पूरी तरह से निःशुल्क रहेंगे।
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पर्सन-टू-पर्सन (P2P) फ्री: दो सामान्य व्यक्तियों के निजी बैंक खातों के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
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लागू होने की तिथि: यह नया सिस्टम 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का स्पष्टीकरण
इस विवाद के बीच केंद्र सरकार और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति साफ करते हुए कहा था:
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MDR टैक्स नहीं, बल्कि एक फीस है: यह राशि बैंकों, पेमेंट गेटवे और फिनटेक कंपनियों के बीच बांटी जाएगी।
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ग्राहकों पर असर नहीं: वित्त मंत्री ने अगस्त में स्पष्ट किया था कि MDR का बोझ ग्राहकों (Consumers) पर नहीं पड़ेगा, यह केवल कारोबारियों पर लागू होगा।
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फंड का इस्तेमाल: इस शुल्क से मिलने वाले राजस्व का उपयोग डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, साइबर सिक्योरिटी में सुधार और फिनटेक ईकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए किया जाएगा।
अब सबकी निगाहें 4 हफ्ते बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां केंद्र सरकार और RBI को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करना होगा। सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट्स पर MDR चार्ज पर रोक से इनकार, केंद्र व RBI को नोटिस
