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सावधान: सीने में दर्द ही नहीं, ये आम संकेत भी हो सकते हैं ‘साइलेंट हार्ट डिजीज’ का इशारा; जानिए कैसे करें बचाव

सावधान: सीने में दर्द ही नहीं, ये आम संकेत भी हो सकते हैं ‘साइलेंट हार्ट डिजीज’ का इशारा; जानिए कैसे करें बचाव

नई दिल्ली: हार्ट से जुड़ी बीमारी का नाम आते ही अक्सर सीने में दर्द, सांस फूलना या बेचैनी जैसे लक्षण दिमाग में आते हैं। हालांकि, कई बार हृदय की धमनियों (आर्टरी) में ब्लॉकेज होने के बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता। इस स्थिति को साइलेंट इस्किमिया (Silent Ischemia) या आम भाषा में साइलेंट हार्ट डिजीज (Silent Heart Disease) कहा जाता है। इसका पता अक्सर किसी रूटीन चेकअप, ईसीजी (ECG) या अन्य बीमारियों की जांच के दौरान चलता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. विवेक कुमार (हेड – कार्डियोलॉजी, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, मैक्स हॉस्पिटल, साकेत) के अनुसार:

  • धमनियों में वसा और कोलेस्ट्रॉल जमा होने से जब हृदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह कम होता है, तो आमतौर पर दर्द होता है।
  • लेकिन कई मरीजों में दर्द महसूस ही नहीं होता। इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हृदय सुरक्षित है।
  • लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी बने रहने से हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है, जिससे अचानक हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।

किन लोगों को है साइलेंट हार्ट डिजीज का सबसे ज्यादा खतरा?

  • डायबिटीज के मरीज: डायबिटीज के कारण तंत्रिकाओं (Nerves) को नुकसान पहुंचता है, जिससे सीने में दर्द का अहसास नहीं हो पाता।
  • अन्य जोखिम कारक: हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, स्मोकिंग (धूम्रपान), शारीरिक निष्क्रियता, तनाव और परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारी का इतिहास होना।
  • उम्र का प्रभाव: बढ़ती उम्र के पुरुषों और मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद महिलाओं में भी यह खतरा बढ़ता है।

सीने में दर्द न सही, पर ये हो सकते हैं ‘साइलेंट’ संकेत:

कई बार मरीज सीने के दर्द के बजाय अन्य लक्षणों का अनुभव करते हैं, जिन्हें अक्सर गैस, थकान या बुढ़ापे का असर समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है:

  • असामान्य या बहुत ज्यादा थकान होना।
  • सीढ़ियां चढ़ते समय सांस का फूलना।
  • अचानक चक्कर आना या ठंडा पसीना आना।
  • पेट में अपच या गैस जैसा महसूस होना।
  • जबड़े, पीठ, कंधे या बाएं हाथ में हल्का दर्द महसूस होना।

जांच और निदान (Diagnosis):

डॉक्टर मरीज की उम्र और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर कुछ जरूरी जांच कराने की सलाह देते हैं:

  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल की जांच।
  • ईसीजी (ECG) और ट्रेडमिल टेस्ट (TMT)।
  • इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography)।
  • जरूरत पड़ने पर सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी (CT Coronary Angiography)।

बचाव और लाइफस्टाइल में सुधार:

  • हेल्दी आदतें: नियमित व्यायाम करें, संतुलित आहार लें, धूम्रपान से दूरी बनाएं, वजन और तनाव को नियंत्रित रखें।
  • नियमित चेकअप: 40 वर्ष की उम्र के बाद (या हाई रिस्क ग्रुप में होने पर उससे पहले भी) नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराएं।
  • इमरजेंसी को न नकारें: यदि कभी अचानक सीने में दबाव, जबड़े या बाएं हाथ में तेज दर्द, ठंडा पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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