RBI नियमों के बाद NDF मार्केट में कंपनियों की गतिविधि उछली, रुपये पर अस्थायी दबाव
RBI नियमों के बाद NDF मार्केट में कंपनियों की गतिविधि उछली, रुपये पर अस्थायी दबाव, भारतीय कंपनियों ने NDF (Non‑Deliverable Forwards) मार्केट में $7.54 अरब से ऊपर का ट्रेडिंग वॉल्यूम दर्ज किया — यह सामान्य औसत से लगभग 7 गुना ज़्यादा था। इसमें से लगभग $7.51 अरब डॉलर कंपनियों द्वारा बेचे गए, जबकि खरीद केवल $24 मिलियन रही। यह उछाल RBI के 27 मार्च के FX नियमों के बाद आया, जिसमें बैंकों को नेट ऑनशोर ओपन FX पोज़िशन्स पर सीमा लगाने का निर्देश दिया गया था।
RBI नियमों के बाद NDF मार्केट में कंपनियों की गतिविधि उछली, रुपये पर अस्थायी दबाव
क्या हुआ और क्यों?
RBI के निर्देश के बाद बैंकों ने अपनी ऑनशोर डॉलर पोज़िशन्स घटाने के लिए घरेलू बाजार में डॉलर बेचा और NDF में खरीदा। इससे ऑनशोर और ऑफशोर NDF कीमतों के बीच अंतर बढ़ा, जिससे आर्बिट्रेज अवसर पैदा हुए। कंपनियों ने इस अंतर का फायदा उठाते हुए ऑनशोर डॉलर खरीदकर NDF में बेचा, जिससे वे मुनाफ़ा कमा सकीं और ट्रेडिंग वॉल्यूम उछल गया।
रुपये पर असर
इस आर्बिट्रेज‑ड्रिवन गतिविधि के कारण रुपया दबाव में आया और 30 मार्च को ₹1 = 95 से भी ऊपर तक गिर गया — यह अब तक का सबसे निचला स्तर था।इसके बाद RBI ने बैंकों को ग्राहकों को NDF ऑफर करने से रोक दिया और रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं दी, जिससे रुपये में स्थिरता लौटी और यह लगभग ₹93/डॉलर के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।
RBI की अन्य कार्रवाई
RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार की अस्थिरता को रोकने के लिए नियम और सख्ती बढ़ाई है, जिसमें बैंकों के FX डेरिवेटिव संचालन पर कड़े रीग्युलेटरी नियंत्रण शामिल हैं। नए दिशानिर्देश के तहत बैंकों को RBI द्वारा इंगित सीमा (नेट ऑनशोर FX पोज़िशन कैप) के भीतर रहना है, जिससे आर्बिट्रेज गतिविधि नियंत्रित करने की कोशिश हो रही है। RBI के नए नियमों के बाद 30 मार्च को NDF बाजार में कंपनियों की गतिविधि अचानक बढ़ी और ट्रेडिंग वॉल्यूम $7+ बिलियन तक पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव बना, लेकिन बाद में RBI की सख्ती से मुद्रा को स्थिरता मिली।

