मंत्री प्रतिमा बागरी के ‘कास्ट सर्टिफिकेट’ पर आज भोपाल में बड़ी सुनवाई, SC छानबीन समिति के सामने होंगी पेश।

मंत्री प्रतिमा बागरी के 'कास्ट सर्टिफिकेट' पर आज भोपाल में बड़ी सुनवाई, SC छानबीन समिति के सामने होंगी पेश।

मंत्री प्रतिमा बागरी के ‘कास्ट सर्टिफिकेट’ पर आज भोपाल में बड़ी सुनवाई, SC छानबीन समिति के सामने होंगी पेश।

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अपने अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर विवादों में घिरीं राज्य मंत्री सोमवार (6 जुलाई) को राजधानी भोपाल में उच्च स्तरीय छानबीन समिति (स्क्रूटनी कमेटी) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगी। इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान वह समिति के सामने अपना पक्ष रखेंगी और अपने दावे के समर्थन में मूल दस्तावेज व साक्ष्य प्रस्तुत करेंगी।

यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय बेहद गरमाया हुआ है, क्योंकि राज्य मंत्री के अलावा प्रदेश के करीब 500 से ज्यादा बड़े अधिकारी और कर्मचारी भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के विवादों में घिरे हुए हैं और छानबीन समिति के पास करीब 7,000 ऐसे मामले लंबित हैं।

कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने की थी शिकायत

इस पूरे विवाद की शुरुआत कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार की शिकायत से हुई थी। अहिरवार ने छानबीन समिति और कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि सतना क्षेत्र की अनुसूचित जातियों की आधिकारिक सूची में ‘बागरी’ जाति शामिल नहीं है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि प्रतिमा बागरी वास्तव में राजपूत या ठाकुर (सामान्य वर्ग) समुदाय से संबंध रखती हैं, और उन्होंने आरक्षित सीट (रैगांव विधानसभा) से चुनाव लड़ने के लिए कथित तौर पर अवैध रूप से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र इस्तेमाल किया।

हाई कोर्ट के दखल के बाद तेज हुई कार्रवाई

कांग्रेस नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए अप्रैल 2026 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (जबलपुर मुख्यपीठ) ने राज्य सरकार और उच्च स्तरीय छानबीन समिति को इस मामले की त्वरित जांच करने और समय सीमा के भीतर निर्णय लेने के सख्त निर्देश दिए थे। कोर्ट के इसी कड़े रुख के बाद छानबीन समिति ने तेजी दिखाते हुए राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को नोटिस जारी कर 6 जुलाई को सभी आवश्यक और ओरिजिनल दस्तावेजों (जैसे कि 1950 में उनके परिवार के सतना में निवास करने के प्रमाण) के साथ तलब किया था।

राजनीतिक भविष्य पर टिकी नजरें

राजनीतिक और कानूनी जानकारों के मुताबिक, आज सुबह 11 बजे होने वाली इस बैठक और सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। प्रतिमा बागरी के पक्ष के सूत्रों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जो यह साबित करते हैं कि उनके परिवार के सदस्य पहले भी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीटों से विधायक और मंत्री रह चुके हैं।

यदि छानबीन समिति उनके दस्तावेजों से संतुष्ट होकर उन्हें क्लीन चिट देती है, तो वह मोहन सरकार की दूसरी ऐसी मंत्री होंगी जिन्हें इस मामले में राहत मिलेगी। इससे पहले राज्य मंत्री गौतम टेटवाल को भी छानबीन समिति से राहत मिल चुकी है। बहरहाल, समिति का जो भी फैसला होगा, उसका असर प्रतिमा बागरी के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ना तय है।

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