Friday, April 24, 2026
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स्टाम्प पर पुरानी तारीख और सील लगाकर बेचने वाला वेंडर गिरफ्तार, तीन साल से बिना लाइसेंस बेच रहा था

जबलपुर, आशीष शुक्ला। जबलपुर jabalpur ओमती पुलिस ने सोमवार को स्टाम्प पर पुरानी तारीख व सील लगाकर बेचने के मामले में फरार वेंडर को दबोचा है।

आरोपी के खिलाफ थाने में फरवरी व मार्च में दो प्रकरण दर्ज किए गए थे। दोनों प्रकरण जमीन बिक्री और पैसों के लेन-देन संबंधी अनुबंध से जुड़े थे। दोनों ही मामलों में वेंडर समेत अन्य के खिलाफ धारा 420, 465, 467, 471, 120बी भादवि का प्रकरण दर्ज है। आरोपी के कब्जे से स्टाम्प बिक्री से संबंधित रजिस्टर, लाइसेंस, सील आदि जब्त किए हैं।

लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी बेच रहा था स्टाम्प

संगम कॉलोनी उखरी रोड कोतवाली निवासी दिनेश चंद्र जैन स्टाम्प वेंडर है। हालांकि उसका लाइसेंस मार्च 2017 में समाप्त हो चुका है। फिर भी वह स्टाम्प बेच रहा था। दिनेश चंद्र जैन की जिला न्यायालय गेट नंबर तीन के पास स्टाम्प बिक्री और फोटोकाॅपी की दुकान है। दिनेश चंद्र जैन 1993-94 से 2017 तक स्टाम्प वेंडर के तौर पर बिक्री करने का लाइसेंस लिया था।

स्टाम्प वेंडर दिनेश चंद्र जैन के खिलाफ दर्ज हुआ था दो एफआईआर

10 फरवरी को कोर्ट के आदेश पर ओमती पुलिस ने स्टाम्प वेंडर दिनेश चंद्र जैन, अश्विनी शाह, हेमंत शाह, डॉ. सुधीर यादव, अमित बाभूलकर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। गोलबाजार निवासी संजय कुमार जैन ने कोर्ट में परिवार दायर किया था। इसमें 14 अप्रैल 2018 का एक प्लाॅट संबंधी विक्रय पत्र पेश किया था। इसमें 31 मार्च 2009 की तारीख पड़ी थी। स्टाम्प पर क्रमांक 2881 की सील लगी थी। संदेह होने पर सूचना के अधिकार के तहत उप पंजीयक कार्यालय से जानकारी मांगी, तो पता चला कि उक्त स्टाम्प 2010 में जारी हुआ था* स्टाम्प की तारीख बदली गई थी।

दूसरा मामला 15 लाख लेन-देन का था

वहीं, दूसरा प्रकरण 20 मार्च 2020 को स्टाम्प वेंडर दिनेश चंद्र जैन सहित अन्य के खिलाफ दर्ज किया गया था। पीड़ित चंद्रकांचल अपार्टमेंट गढ़ा निवासी राजेंद्र तिवारी की माढ़ोताल में प्लॉट है। 15 जून 2007 को उसके फर्जी हस्ताक्षर से 50-50 रुपए के स्टाम्प पर अनुबंध पत्र तैयार किया गया था। इसमें उक्त प्लाॅट 15 लाख रुपए में कछियाना निवासी निशा राठौर व संजय राठौर को देना दर्शाया गया था। दिनेश चंद्र ने सुरेश कुमार वर्मा और केडीएफ परमार के नाम से जारी 10-10 रुपए के स्टाम्प का नंबर फर्जी अनुबंध वाले स्टाम्प पर 608147 व 630878 दर्शाया था।

स्टाम्प बिक्री की जानकारी रजिस्टर में दर्ज कर हर वर्ष 5 अप्रैल तक जमा करना पड़ता था।

इस तरह करता था खेल

स्टाम्प की राशि चालान के माध्यम से बैंक में जमा होता है। वहां से ट्रेजरी में चालान की प्रति देने पर स्टाम्प जारी होता है। हर वित्तीय वर्ष में पांच अप्रैल तक विक्रय और बच गए स्टाम्प की सूची उपपंजीयक कार्यालय में देनी होती है। इसके बाद बचे स्टाम्प बिक्री की अनुमति मिलती है। आरोपी इन्हीं बचे हुए स्टाम्प में कुछ को दूसरे के नाम पर बेचना दर्शा देता था। बाद में इसका प्रयोग तारीख बदल कर करता था। डॉक्टर सुधीर यादव को उसने 2010 के स्टाम्प में 2008 की फर्जी तारीख व नंबर डालकर दिया था। आरोपी का लाइसेंस 2017 में समाप्त हो चुका है। बावजूद, वह धड़ल्ले से स्टाम्प बेच रहा था।

स्टाम्प फर्जीवाड़ा में था फरार

एसआई सतीश झारिया ने बताया, स्टाम्प वेंडर दिनेश चंद्र जैन के खिलाफ वर्ष 2020 में दो एफआईआर स्टाम्प पेपर को पुराना दिखाने के फर्जीवाड़े का दर्ज है। दोनों मामलों में इसकी तलाश थी। उसे गिरफ्तार कर स्टाम्प बिक्री से जुड़े लाइसेंस, रजिस्टर और सील आदि जब्त किए गए हैं। आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम