सौभाग्य योजना में 12 करोड़ रुपये का घोटाला !,16 हजार घरों में बिजली पहुंचाने की बात, ढूंढने पर नहीं मिले एक भी कनेक्शन
जबलपुर। 2018 में भी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सौभाग्य योजना की जांच शुरू हुई थी। विधानसभा सदन में सरकार ने माना था डिंडौरी-मंडला जिले में करीब 12 करोड़ रुपये का घोटाला सौभाग्य योजना में हुआ है।
इसके लिए तकरीबन 9 इंजीनियरों को दोषी बताया गया था। तत्कालीन ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने सदन में ही मंडला और डिंडौरी जिले के अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री समेत सहायक अभियंता जांच के दायरे में आए थे। इसके बाद सरकार ने बारीकी से जांच करवाने का फैसला किया था। घोटाले में मंडला-डिंडौरी के अलावा सीधी-सिंगरौली, बालाघाट समेत प्रदेश के दर्जनभर जिलों में गड़बड़ी की संभावना जाहिर की गई थी।
बिजली पहुंचाने की ‘सौभाग्य ‘योजना में जमकर घोटाला हुआ। ये बात दूसरी बार हुई जांच में भी साबित हुई है। मंडला जिले में अकेले 3 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला उजागर हुआ है।
इसमें 16 हजार ऐसे घर मिले हैं जो कागजों में रोशन हैं। कागजों में कई उपभोक्ता ऐसे मिले जो दीनदयाल ग्रामीण विद्युत योजना में रोशन हो चुके थे। उनके घर फिर बिजली पहुंचाने का बिल लगा दिया। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पास जांच रिपोर्ट आ चुकी है। डिंडौरी जिले की जांच पूरी होने का इंतजार हो रहा है।
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ठेकेदारों के साथ मिलकर अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन अभियंता और मैदानी अमले काम किया। बिना जांच किये ही बिल पास हुए। पोल बिना क्रांकीट लगाए ही गाड़ दिए। जो हल्की बारिश में गिर गए। बिना टेंडर अधीक्षण यंत्री को 5 लाख रुपये के काम करवाने का अधिकार था। इस नियम को शिथिल कर 5-5 लाख में 25 लाख रुपये के काम बांटकर ठेकेदारों को उपकृत किया गया।
मुख्य अभियंता ऑपरेशन पीके क्षत्रिय की निगरानी में जांच के लिए कई दल बने। जिले के एक-एक कनेक्शन, पोल और ट्रांसफॉर्मर का भौतिक सत्यापन करवाया गया।
6 माह के लंबे वक्त जांच पूरी हो पाई। जमीनी हकीकत देखने कई अधिकारियों को लगाया। जबलपुर से कई दिनों अफसर मंडला में डेरा डाले रहे। जिले में 40 हजार कनेक्शन में 16 हजार से ज्यादा फर्जी मिले। सूत्रों का दावा है कि 40 फीसद कनेक्शन नहीं मिले। बिजली अधोसंरचना का काम 80 फीसद मिला। कई कनेक्शन राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में लगे थे जिन्हें सौभाग्य में होना बताया गया।

