सावधान! अगर नॉमिनी की भी मौत हो गई, तो क्या डूब जाएगा बैंक में जमा आपका पैसा? जानें RBI का कड़ा नियम। अक्सर लोग बैंक खाता खोलते समय नॉमिनी तो बना देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर खाताधारक और नॉमिनी दोनों का निधन हो जाए, तो बैंक में जमा गाढ़ी कमाई किसे मिलेगी? यह एक ऐसा सवाल है जो कानूनी पेचीदगियों की वजह से अक्सर लोगों को परेशान करता है। आइए, RBI के नियमों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर इसे विस्तार से समझते हैं।
कौन होता है असली वारिस?
बैंकिंग नियमों और सुप्रीम कोर्ट (1984, सर्बती देवी बनाम ऊषा देवी केस) के फैसले के अनुसार, नॉमिनी कभी भी पैसे का अंतिम मालिक नहीं होता। नॉमिनी की भूमिका सिर्फ एक ट्रस्टी की होती है, जिसका काम बैंक से पैसा लेकर उसे असली वारिसों तक पहुँचाना है। यदि दोनों की मृत्यु हो जाती है, तो पैसा सीधे मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों (Legal Heirs) को मिलता है।
वारिस की पहचान कैसे होती है?
वारिस तय करने के मुख्य रूप से दो आधार होते हैं:
- वसीयत (Will): यदि खाताधारक ने अपनी वसीयत छोड़ी है, तो उसमें लिखे नाम के आधार पर पैसा मिलेगा।
- उत्तराधिकार कानून (Succession Laws): वसीयत न होने पर धर्म के आधार पर कानून लागू होते हैं (जैसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956)। इसमें आमतौर पर पत्नी, बच्चे और माता-पिता को प्राथमिकता दी जाती है।
क्लेम के लिए जरूरी दस्तावेज
- ऐसी स्थिति में वारिसों को बैंक में जाकर दावा पेश करना होता है। इसके लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है:
- खाताधारक और नॉमिनी दोनों का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)।
- दावेदार का पहचान पत्र और पते का सबूत।
- लीगल हेयर सर्टिफिकेट या सक्सेशन सर्टिफिकेट (Succession Certificate)।
- बैंक द्वारा मांगी गई अन्य औपचारिकताएं।
अगर कोई क्लेम न करे तो क्या होगा?
- 10 साल का नियम: यदि 10 साल तक खाते में कोई हलचल नहीं होती और कोई दावा नहीं किया जाता, तो यह पैसा Unclaimed घोषित कर दिया जाता है।
- DEAF फंड: RBI के निर्देशानुसार, यह राशि Depositor Education and Awareness Fund में भेज दी जाती है।
- क्या पैसा डूब जाता है? नहीं! असली वारिस उचित दस्तावेजों के साथ कभी भी इस फंड से अपना पैसा वापस मांग सकते हैं।
- विशेष स्थितियां: नॉमिनी न होने पर और जॉइंट अकाउंट
- अगर नॉमिनी नहीं है: प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन कानूनी वारिसों को ही पैसा मिलता है। उन्हें अपनी दावेदारी कानूनी दस्तावेजों से साबित करनी होती है।
- जॉइंट अकाउंट (Joint Account): यहाँ नियम अलग है। अगर एक खाताधारक की मौत होती है, तो जीवित खाताधारक को पूरा अधिकार मिल जाता है। उसे बस मृतक का डेथ सर्टिफिकेट जमा करना होता है।बैंकिंग ट्रांजेक्शन को आसान बनाने के लिए हमेशा नॉमिनी अपडेट रखें और संभव हो तो एक वसीयत जरूर तैयार करें। इससे आपके बाद आपके परिवार को बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

