सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर की जा रही तैयारियां
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जबलपुर। शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने का एक प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को दो साल पहले भेजा था। इसी के तहत सरकार ने 5 जिलों में सबसे पहले प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित करने को हरी झंडी दी थी।
इसके सफल प्रयोग के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग ने जबलपुर जिले के सरकारी स्कूलों में यह कक्षाएं संचालित करने का प्रस्ताव तैयार किया। बताया जा रहा है कि 5 जिलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन बेहतर तरीके से हुआ है इसके तहत स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में भी इजाफा हुआ है।
सरकारी विद्यालयों में प्रथम कक्षा से प्रवेश मिलता है। वो भी तब जब बच्चों की न्यूनतम आयु छह वर्ष हो। जबकि निजी स्कूलों में ढाई से तीन वर्ष की आयु में बच्चे को स्कूल में प्रवेश मिल जाता है। इसी के चलते सालों साल निजी स्कूलों में बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों से कई गुणा ज्यादा है। दूसरी बात यह भी है कि निजी स्कूलों में ज्यादातर छोटे बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई से जुड़ जाते हैं। पहली कक्षा में आने तक अंग्रेजी अक्षरों की अच्छी पहचान हो जाती है।
जबलपुर के 100 सरकारी स्कूलों में भी प्री-प्राइमरी कक्षाएं लगनी शुरू हो जाएंगी। इसके लिए शिक्षा विभाग भोपाल की ओर से जिला शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन मांगा गया था। फिलहाल छिंदवाड़ा, भोपाल, सीहोर, सागर और शहडोल जिले में करीब 1500 प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित हो रही