ये संकेत बताते हैं, गुरू है भारी होगी हानि
ज्यातिष डेस्क। ज्योतिष विद्वानों का कहना है, बृहस्पति सबसे बड़ा ग्रह है। जिन्हें गुरु भी कहते हैं। महर्षि पराशर का मत है, ‘किं कुर्वन्ति सर्वग्रह यस्य केंद्रे बृहस्पति’ इसी कारण हमारे आचार्यों ने ग्रहरूपी समुदाय में बृहस्पति को सिंह की संज्ञा दी है। यह एक ही ऐसा ग्रह है जो देव-कृपा एवं मोक्ष कराने के समर्थ है। यह धन, संतान, भाग्य, जीविका, शक्ति और लाभ का कारक है। जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति प्रबल होने पर जातक को वाहन व भवन आदि अनेक सुखों की प्राप्ति होती है। केंद्र त्रिकोण, तृतीय तथा एकादश भाव में अति शुभ रहता है। लाल किताब के अनुसार जानें कैसे ये ग्रह होता है भारी और करवाता है हानि।

घर के वायु-मंडल में अवरोध पैदा होना।
दक्षिण के रास्ते में समस्याएं आना।
ईशान कोण का दूषित होना।
किसी के प्रभाव में आकर विचारों में अपवित्रता आना।
दाढ़ी बढ़ाना।
सिर पर चोटी की जगह से बालों का उड़ जाना।
संतान और पिता में वाद-विवाद होते रहना।
गुरु कभी भी बेईमान और झूठे व्यक्ति के साथ नहीं रहते।
शराबी और मांस खाने वाले व्यक्ति से बृहस्पति अपना मुंह मोड़ लेते हैं।
बुद्धि साथ नहीं देती।
मोटापा घटना और बढ़ना।
पेट और पाचन तंत्र का ठीक न होना।
पढ़ाई में मन नहीं लगता, याद किया हुआ भूल जाता है।
वैवाहिक जीवन में खट्टास आती है।
कुंवारों को शादी में अड़चनें आती हैं।
मनचाहा जीवनसाथी नहीं मिल पाता।
कमाई और खर्च में असंतुलन रहता है।
व्यक्ति सफलता के शिखर पर पंहुचते- पंहुचते रह जाता है।

