FEATUREDjabalpur

मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजनाः जिला स्तरीय कृषि महोत्सव  

जबलपुर, । मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के तहत  सोमवा जबलपुर कृषि उपज मण्डी परिसर में आयोजित जिला स्तरीय कृषि महोत्सव के माध्यम से जिले के 2 हजार 531 किसानों को फसलों के बाजार भाव और समर्थन मूल्य के अंतर की 9 करोड़ 96 लाख 55 हजार 621 रूपये की राशि के भुगतान प्रमाण पत्र प्रदान किये जा रहे हैं ।

दिये गए 9 करोड़ 96 लाख 55 हजार  के भुगतान प्रमाण पत्र

इन किसानों ने एक दिसंबर से 31 दिसंबर के बीच भावांतर भुगतान योजना के तहत अधिसूचित मण्ड़ियों में अपनी उपज का विक्रय किया था ।  भावांतर भुगतान योजना के तहत किसानों को भुगतान प्रमाण पत्र वितरित करने के लिए आयोजित किया जा रहा जिला स्तरीय कृषि महोत्सव प्रमुख जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में  सुबह 11.30 बजे से प्रारंभ हुआ।

जिला स्तरीय कृषि महोत्सव के माध्यम से जिन 2 हजार 531 किसानों को अंतर की राशि के भुगतान प्रमाण पत्र प्रदान किये जायेंगे उनके बैंक खातों में यह राशि जमा कराई जा चुकी है । इसे मिलाकर मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के तहत अब तक जिले के 6 हजार 411 किसानों को 25 करोड़ 26 लाख 69 हजार 460 रूपये का भुगतान किया जा चुका है । इसके पहले 16 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक उपज का विक्रय करने वाले 1 हजार 06 किसानों को 2 करोड़ 90 लाख 11 हजार 84 रूपये तथा एक नवंबर से 30 नवंबर तक उपज का विक्रय करने वाले 2 हजार 874 किसानों को 12 करोड़ 40 लाख 02 हजार 755 रूपये की राशि का भुगतान किया गया था ।

अभी 136 किसान ऐसे हैं जिन्हें योजना के तहत 43 लाख 74 हजार 867 रूपये की राशि का भुगतान किया जाना है ।  इन किसानों को अंतर की राशि के भुगतान के लिए शासन से अतिरिक्त आबंटन मांगा गया है ।मुख्यमंत्री के संबोधन का  सीधा प्रसारणः भावांतर भुगतान योजना के तहत किसानों को अंतर की राशि के भुगतान प्रमाण पत्र प्रदान करने के लिए आयोजित जिला स्तरीय कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संबोधन का सीधा प्रसारण भी किया गया ।

भोपाल में आयोजित भावांतर भुगतान योजना के राज्य स्तरीय समारोह से मुख्यमंत्री के संबोधन के सीधे प्रसारण के लिए कार्यक्रम स्थल पर एल.ई.डी. वाल लगाई  गई थी।
चना,मसूर, सरसों और प्याज की फसल लेने वाले किसानों का पंजीयन  किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के तहत रबी सीजन में चना, मसूर, सरसों और प्याज की फसल लेने वाले जिले के किसानों का पंजीयन 12 फरवरी से प्रारंभ हुआ जा  12 मार्च तक चलेगा  उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास एस.के. निगम के मुताबिक किसानों का पंजीयन निरूशुल्क होगा तथा गेहूं और धान उपार्जन करने वाली सभी प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां उनका पंजीयन करेंगी । उप संचालक ने समीप की समिति में अपना पंजीयन कराने की अपील किसानों से की है ।

5प्रदेश में 5.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है जैविक खेती

मध्यप्रदेश जैविक खेती के मामले में अग्रणी राज्यों मेंजबलपुर, । मध्यप्रदेश में हाल के कुछ वर्षों में जैविक खेती के मामले में तेजी से काम हुआ है। कृषि क्षेत्र की संस्था एग्रीकल्चर एण्ड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट डेव्हलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के अनुसार मध्यप्रदेश में वर्तमान में करीब 5 लाख 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है। प्रदेश में 40 प्रतिशत से अधिक जैविक कृषि उत्पाद का उत्पादन हो रहा है, जो देश के कुल जैविक कृषि उत्पाद का करीब 40 प्रतिशत है।प्रदेश में 313 विकासखण्ड के 1800 से अधिक ग्रामों में बड़ी संख्या में जैविक खेती को अपनाया गया है।

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये मध्यप्रदेश में वर्ष 2011 में जैविक कृषि नीति लागू की गई। इसके बाद से जैविक खेती में लगातार वृद्धि हो रही है। प्रदेश में व्यावसायिक संगठन एसोचौम ने सर्वे किया था। सर्वे में यह बताया गया था कि प्रदेश मे अगले 5 वर्षों में 600 करोड़ रुपये के जैविक उत्पाद के निर्यात की संभावना है। मध्यप्रदेश के विदिशा, सागर और सीहोर जिलों में उगाये जा रहे शर्बती गेहूँ, मालवा क्षेत्र का ड्यूरम गेहूँ, नर्मदा पठार के होशंगाबाद और नरसिंहपुर जिले में जैविक तरीके से उगाई जा रही अरहर दाल की माँग देशभर में है।

मण्डला और डिण्डौरी जिलों के कोदो-कुटकी, बैगानी दाल की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी माँग है। रायसेन, भोपाल, जबलपुर, मण्डला एवं बालाघाट क्षेत्र का बासमती चावल एवं निमाड़ एवं मालवा के जैविक कपास की माँग देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है।

जैविक खेती में हो रहे नये-नये अनुसंधान की जानकारी देने के लिये मण्डला में जैविक अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की जा रही है। प्रदेश में जैविक उत्पादों की बिक्री के लिये भी किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने जैविक उत्पाद की बिक्री के लिये चयनित कृषि उपज मण्डियों में अलग व्यवस्था की है। फोटो

Leave a Reply

Back to top button