Saturday, May 2, 2026
मध्यप्रदेश

बेरहम दुनिया: बस वाले बैठा नहीं रहे थे, मजबूरी में गरीब मां-बाप ने नवजात के शव को थैले में छिपाकर किया 150KM का सफर

बेरहम दुनिया: बस वाले बैठा नहीं रहे थे, मजबूरी में गरीब मां-बाप ने नवजात के शव को थैले में छिपाकर किया 150KM का सफर मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जानकर हैरानी होगी कि नवजात शिशु के शव को थैले में छुपाकर उसके परिजन घंटों भटकते रहे, लेकिन किसी ने उनकी मदद करना तक मुनासिब नहीं समझा।

दरअसल 13 जून को डिंडौरी के सहजपुरी गांव में रहने वाली जमनी बाई को प्रसव पीड़ा होने पर डिंडौरी जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था और प्रसव के बाद नवजात शिशु की हालत बिगड़ने पर उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान शुक्रवार को नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने डिंडौरी वापस आने के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर प्रबंधन से शव वाहन का इंतजाम कराने मिन्नतें कीं, लेकिन प्रबंधन द्वारा शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।

कोई उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया

मेडिकल कॉलेज से नवजात का शव ऑटो में रखकर परिजन जैसे-तैसे जबलपुर बस स्टैंड पहुंचे और शव को थैले में छिपाकर बस में 150 किलोमीटर का सफर तय करके देर रात डिंडौरी पहुंचे। थैले में शव रखकर परिजन डिंडौरी बस स्टैंड में रिश्तेदारों के इंतज़ार में यहां-वहां भटक रहे थे, लेकिन डिंडौरी में भी कोई उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया।

 

मीडिया ने जब परिजनों से शव को थैले में रखने की वजह जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि शव देखकर बस संचालक उन्हें बस में बैठाने से आनाकानी कर रहे थे और उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे प्राइवेट वाहन कर सकें, लिहाजा उन्होंने शव को थैले में छुपा लिया और बस में बैठकर किसी तरह डिंडौरी पहुंचे। सुरतिया बाई बताती हैं की वे मेहनत मजदूरी करके किसी तरह जीवनयापन करते हैं ऐसे में प्राइवेट वाहन का किराया कहां दे पाते।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम