बरगी के ‘रियल हीरो’: पायलट ने अनसुनी की चेतावनी, तो खुद की कमर में रस्सा बांध मौत के मुंह से पर्यटकों को खींच लाए मजदूर
जबलपुर । बरगी के ‘रियल हीरो’: पायलट ने अनसुनी की चेतावनी, तो खुद की कमर में रस्सा बांध मौत के मुंह से पर्यटकों को खींच लाए मजदूर। बरगी बांध क्रूज हादसे में जहाँ लापरवाही की बड़ी कहानी सामने आई है, वहीं कुछ ऐसे गुमनाम नायक भी उभरे हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना कई लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला। ये नायक हैं जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन इंटकवेल में काम करने वाले बिहार के श्रमिक।
प्रत्यक्षदर्शी की जुबानी: “पायलट ने बात मानी होती तो बच जाती जान”
श्रमिक मुकेश कुशवाहा ने आँखों देखा हाल बताते हुए कहा— “हम इंटकवेल के ऊपर काम कर रहे थे। तेज हवाओं के बीच क्रूज अनियंत्रित होकर लहरा रहा था। हम चिल्ला-चिल्ला कर पायलट को किनारे आने का इशारा कर रहे थे, लेकिन पायलट क्रूज को बांध के और गहरे पानी में ले गया। अगर क्रूज किनारे आता, तो एक भी जान नहीं जाती।
बरगी के ‘रियल हीरो’: पायलट ने अनसुनी की चेतावनी, तो खुद की कमर में रस्सा बांध मौत के मुंह से पर्यटकों को खींच लाए मजदूर
कमर में रस्सा बांधकर मौत से लड़े श्रमिक
जब क्रूज डूबने लगा, तो मुकेश और उनके साथियों ने जो किया वह किसी मिसाल से कम नहीं है।
-
साहस की मिसाल: मुकेश, सागर, वृंदा यादव, राजेश, अरविंद, संजय साहनी, छोटू राम और राजकुमार जैसे श्रमिकों ने एक-दूसरे की कमर में रस्सा बांधा और उफनते पानी में कूद गए।
-
बचाव कार्य: इन मजदूरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला। यहाँ तक कि जिस पायलट की लापरवाही से यह हादसा हुआ, उसे भी इन मजदूरों ने ही डूबने से बचाया।
-
दुखद अंत: कड़ी मशक्कत के बाद भी ये जांबाज 4 पर्यटकों को नहीं बचा सके, जिनके शवों को इन्होंने खुद बांध से बाहर निकाला।

