बुराड़ी कांड: घर में 3 दिन रहे परिवार के बचे हुए सदस्य, अब वहां बनाएंगे मंदिर
नई दिल्ली। दिल्ली के बुराड़ी में इस साल 1 जुलाई को एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के मामले ने सभी को हैरान कर दिया था। अब इस घर को कोर्ट ने 15 अक्टूबर की शाम को फिर से खोल दिया गया है और उसे परिवार के बचे सदस्यों को सौंप दिया गया है। भाटिया परिवार के 11 सदस्यों: नारायणी देवी (77), उनके बेटे भावनेश (55) और ललित (45), उनकी बहुएं सविता (48) व टीना (42), बेटी प्रतिभा (57) और पांच पोते-पोतियां प्रियंका (33), नीतू (25), मोनु (23) और धुव्र (15) और शिवम (15) को पड़ोसियों ने अपने घर में मृत पाया। पुलिस जांच, शव रिपोर्ट और घर से मिले हाथ से लिखे पत्रों से अभी तक यह निष्कर्ष निकाला है कि परिवार एक अनुष्ठान कर रहा था जो कि गलत हो गया और उनकी मौत हो गई।
नारायणी के सबसे बड़े बेटे दिनेश सिंह चुंडावत अपनी पत्नी कमलेश, बहन सुजाता नागपाल के साथ इस घर में गए और वहां उन अफवाहों के बीच तीन रातें बिताई जिसमें कहा जा रहा था कि यह घर हॉन्टेड है और जिनकी घर में मौत हुई है, उनमें कथित रूप से प्रेत का साया था और फिर वे खुद प्रेत बन गए।
दिनेश ने कहा कि वे अपने घरवालों की मौत के बाद से ऐसी झूठी कहानियां सुन रहे थे। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में रहने वाले दिनेश के मुताबिक, ‘हम इस घर को मंदिर में तब्दील करने की योजना बना रहे थे क्योंकि कोई भी इस संपत्ति को खरीदना नहीं चाहता था। हम ऐसी अफवाहों को विराम देना चाहते थे और उसके लिए घर में हमारा जाना और बिना किसी हवन या पूजा के घर में रहना जरूरी था।’
उन्होंने यह भी कहा कि उस घर में रहते हुए उन्हें किसी तरह का डर या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि उन्हें वहां अत्यधिक शांत महसूस हुई। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि घर के पीछे मौजूद परिवार के मृत सदस्यों की तस्वीरें, कपड़े और उनके सामान को देखकर भावुक हो गए। पुलिस ने रविवार को शाम 6 बजे घर खोला था और परिवार के सदस्यों को घर की चाबी सौंपी थी।