Supreme Court New Judges: केंद्र की मुहर के साथ ही जस्टिस वी मोहना ने रचा इतिहास-सीधे ‘वकील’ से बनीं सुप्रीम कोर्ट की जज; शीर्ष अदालत में अब रिकॉर्ड 37 न्यायाधीश
Supreme Court New Judges: केंद्र की मुहर के साथ ही जस्टिस वी मोहना ने रचा इतिहास-सीधे 'वकील' से बनीं सुप्रीम कोर्ट की जज; शीर्ष अदालत में अब रिकॉर्ड 37 न्यायाधीश
Supreme Court New Judges: केंद्र की मुहर के साथ ही जस्टिस वी मोहना ने रचा इतिहास-सीधे 'वकील' से बनीं सुप्रीम कोर्ट की जज; शीर्ष अदालत में अब रिकॉर्ड 37 न्यायाधीश
नई दिल्ली: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को हरी झंडी देते हुए चार हाईकोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों और वरिष्ठ महिला अधिवक्ता वी मोहना को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त करने की आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है।
इन नई नियुक्तियों के साथ ही अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जो शीर्ष अदालत के इतिहास में न्यायविदों की एक मजबूत संख्या को दर्शाती है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने बीती 22 और 27 मई की बैठकों के बाद केंद्र सरकार को इन नामों की सिफारिश भेजी थी।
जस्टिस वी मोहना ने रचा इतिहास, बार से सीधे बेंच तक का सफर
केंद्र सरकार द्वारा नाम मंजूर किए जाने के साथ ही जस्टिस वी मोहना ने एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है:
सीधे वकील से जज: जस्टिस वी मोहना, जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद देश के न्यायिक इतिहास में दूसरी ऐसी महिला वकील हैं, जिन्हें ‘बार’ (वकील) से सीधे प्रमोट करके सुप्रीम कोर्ट की जज (बेंच) नियुक्त किया गया है।
12वीं महिला जज: वह सुप्रीम कोर्ट के अब तक के इतिहास की 12वीं महिला जज बनी हैं। वर्तमान में शीर्ष अदालत में कार्यरत जस्टिस बीवी नागरत्ना के बाद वह इस समय सुप्रीम कोर्ट की दूसरी मौजूदा महिला जज होंगी।
लंबा कार्यकाल: सीधे बार से नियुक्ति होने के कारण जस्टिस वी मोहना का सुप्रीम कोर्ट में कार्यकाल पूरे 5 साल का होगा। वे लंबे समय तक शीर्ष अदालत में देश को अपनी सेवाएं देंगी और जून 2031 में सेवानिवृत्त (Retire) होंगी।
पहली पीढ़ी की वकील: पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स की छात्रा
जस्टिस वी मोहना की व्यक्तिगत और शैक्षणिक यात्रा बेहद प्रेरणादायी है:
जन्म और शिक्षा: उनका जन्म 27 जून 1966 को हुआ था। वे भारत के पहले 5 वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स (जिसकी शुरुआत देश में पहली बार 1983 में हुई थी) के पहले बैच की छात्रा रही हैं। उन्होंने कोयंबटूर लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की।
मां की प्रेरणा: अपने एक साक्षात्कार में जस्टिस वी मोहना ने बताया था कि वे अपने पूरे परिवार में पहली पीढ़ी की वकील हैं। उन्हें वकालत के क्षेत्र में आने की प्रेरणा अपनी मां से मिली थी।
हिजाब विवाद से लेकर सेना में महिला कमीशन जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में की पैरवी
वरिष्ठ वकील सी.एस. वैद्यनाथन के मार्गदर्शन में अपने करियर की शुरुआत करने वाली जस्टिस वी मोहना का वकालत का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है:
सीनियर एडवोकेट: वे साल 1996 में ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ बनीं और साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ (Senior Advocate) का दर्जा दिया था।
ऐतिहासिक केस: देश के कई सबसे बड़े और हाई-प्रोफाइल मामलों में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सामने मजबूत पैरवी की, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) दिलाने का ऐतिहासिक मामला।
कर्नाटक का बहुचर्चित हिजाब विवाद मामला।
वरिष्ठ नागरिकों को संपत्ति का कानूनी अधिकार दिलाने से जुड़े मामले।
Supreme Court New Judges: केंद्र की मुहर के साथ ही जस्टिस वी मोहना ने रचा इतिहास-सीधे ‘वकील’ से बनीं सुप्रीम कोर्ट की जज; शीर्ष अदालत में अब रिकॉर्ड 37 न्यायाधीश