गाजियाबाद: दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर स्थित गाजियाबाद के घनी आबादी वाले खोड़ा थाना क्षेत्र में हुए चर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश असद को एक मुठभेड़ (Encounter) में ढेर कर दिया है, जबकि हत्या की साजिश में शामिल उसके पिता नवाब सहित तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
इस पूरी वारदात की जब गहनता से तफ्तीश की गई, तो पता चला कि वारदात की असली वजह सिर्फ आधे घंटे पहले हुआ कोई बाइक विवाद नहीं, बल्कि लंबे समय से सुलग रही ‘पारिवारिक रंजिश और ऑनर किलिंग’ का मामला था।
वो आधा घंटा… जब रची गई कत्ल की खूनी साजिश
पुलिस रिकॉर्ड और चश्मदीदों के मुताबिक, 28 मई (ईद के दिन) दोपहर की टाइमलाइन कुछ इस प्रकार थी:
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दोपहर 3:00 बजे: खोड़ा की एक तंग गली में असद और सूर्या चौहान की मोटरसाइकिलें आमने-सामने आ गईं। रास्ता हटाने को लेकर दोनों में तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज हुई। स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर दोनों को शांत कराया और मामला रफा-दफा करा दिया।
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दोपहर 3:30 बजे (वारदात): यह सुलह महज एक दिखावा थी। ठीक आधे घंटे बाद असद ने अपने पिता नवाब और दोस्तों के साथ मिलकर नवनीत विहार की गली नंबर-4 में सूर्या को घेर लिया। असद के दोस्त फरहान ने उसे चाकू थमाया और पिता नवाब ने चिल्लाकर उकसाया—“आज इसकी कहानी खत्म कर दे।” पिता की शह मिलते ही असद ने सूर्या के पेट में ताबड़तोड़ चाकू घोंपकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
बाइक विवाद तो महज चिंगारी था, असली बारूद था ‘प्रेम प्रसंग’
ऊपरी तौर पर यह हत्या भले ही रोड-रेज की दिख रही थी, लेकिन असद के पारिवारिक सूत्रों और सोशल मीडिया पर आए राजनीतिक बयानों के बाद असली राज खुला:
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बहन से संबंध: मृतक सूर्या चौहान के संबंध मुख्य आरोपी असद की सगी बहन के साथ थे। इस बात को लेकर दोनों परिवारों में लंबे समय से विवाद चल रहा था।
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इलाका बदलने पर भी नहीं माना: पहले दोनों परिवार एक ही गली में रहते थे। इस विवाद और बदनामी से बचने के लिए करीब 8 महीने पहले असद के परिवार ने तंग आकर अपना मकान बदल लिया और दूसरी गली में रहने चले गए। इसके बावजूद सूर्या ने वहां भी चक्कर काटना बंद नहीं किया था। ईद के दिन हुए मामूली बाइक विवाद ने इसी पुरानी आग में घी का काम किया और असद के परिवार ने अपनी कथित ‘इज्जत’ के नाम पर सूर्या की जान ले ली।
एनकाउंटर के बाद बेहद गोपनीय तरीके से हुआ असद का दफीना
पुलिस मुठभेड़ में मारा गया मुख्य शूटर असद पुलिस की गोली लगने से घायल हुआ था, जिसके बाद इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
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कब्रिस्तान का नाम गुप्त: पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर से असद का शव उसके चाचा को सौंप दिया।
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भारी पुलिस बल तैनात: पुलिस के आला अधिकारियों की मौजूदगी में बेहद गोपनीय तरीके से असद का अंतिम संस्कार (दफीना) कराया गया। माहौल न बिगड़े, इसलिए पुलिस ने उस कब्रिस्तान के नाम को पूरी तरह गुप्त रखा है जहां उसे दफनाया गया।
“सबके घरों पर चले बुलडोजर”– रोती मां की चीख
अपने इकलौते जवान बेटे को खोने वाली सूर्या की मां सरोज का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने भरे गले और भड़के आक्रोश के साथ यूपी सरकार और पुलिस से मांग की है:
“सात कसाइयों ने मिलकर मेरे इकलौते बेटे को बेरहमी से काटा है। अभी तो पुलिस ने सिर्फ एक (असद) को मारा है। मेरी मांग है कि बाकी बचे हुए आरोपियों का भी ऐसा ही एनकाउंटर होना चाहिए और उन सबके घरों पर योगी जी का बुलडोजर चलना चाहिए। उन्होंने मेरे बुढ़ापे का इकलौता सहारा छीन लिया।”
इलाके के स्थानीय नागरिकों में भी इस बर्बर हत्याकांड को लेकर भारी गुस्सा है और लोग आरोपियों की संपत्ति कुर्क कर मकान को जमींदोज करने की मांग कर रहे हैं।
