बजट सीमा से कई गुना सड़कें मंजूर, कर्ज लेकर बनेंगी सड़क?
भोपाल। प्रदेश में सड़कों का जाल तेजी के साथ फैल रहा है। इसके बावजूद विधायकों की मांग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इसका ही नतीजा है कि सरकार ने विभाग की बजट सीमा से कहीं ज्यादा सड़क, पुल और पुलिया के प्रस्तावों को मंजूर कर सौ-सौ रुपए के प्रावधान कर दिए हैं।
ये सड़कें कब बनेंगी, यह तो तय नहीं है पर 22-23 हजार करोड़ रुपए के कामों का भूमिपूजन और शिलान्यास हो गया। वहीं, 10 फीसदी मौजूदा सड़कें खराब हालात में हैं। हालांकि, सुखद बात यह है कि बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्यीय राजमार्ग अच्छे हाल में हैं और मुख्य जिला मार्गों पर भी तेजी से काम चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक विधायक पिछले एक साल से सरकार पर सड़क व पुल-पुलिया मंजूर करने के लिए दबाव बना रहे थे। हालात यह हो गए थे कि मुख्यमंत्री कार्यालय को इस काम की कमान अपने हाथ में लेनी पड़ी। हर विधायक को उनकी प्राथमिकता के आधार पर दस-दस सड़कें 2018-19 के बजट में दी गईं। इसके पहले 2017-18 के वित्तीय वर्ष के तीसरे अनुपूरक बजट में भी 396 सड़क और पुल-पुलियों के लिए मात्र 40 हजार रुपए का प्रावधान किया गया।
उधर, इस बार सड़कों के लिए साढ़े सात हजार करोड़ रुपए का बजट मंजूर हुआ है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जबलपुर-बेला राष्ट्रीय राजमार्ग को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश सड़कें या तो बन गई हैं या बनने वाली हैं। औबेदुल्लागंज-जबलपुर सड़क का काम तेजी से चल रहा है तो ब्यावरा-देवास सड़क भी बन रही है। ग्वालियर-ब्यावरा सड़क बन चुकी है। ज्यादातर स्टेट हाईवे बन चुके हैं। 19 हजार किलोमीटर लंबे मुख्य जिला मार्ग में ये 5-6 हजार किलोमीटर सड़क का काम चल रहा है।
कर्ज लेकर बनेंगी सड़क
शहरी हो या ग्रामीण सड़क बनाने के लिए सरकार कर्ज का सहारा ले रही है। मुख्य जिला मार्ग को बनाने के लिए साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का विदेशी कर्ज लेने का फैसला किया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री ग्राम सड़कों को डामर की सड़क में तब्दील करने के लिए भी कर्ज लेने का निर्णय कैबिनेट में हो चुका है। सड़क विकास निगम 400 करोड़ रुपए का कर्ज सड़क विकास निधि के आधार पर लेने जा रहा है।