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मध्यप्रदेश में अब किसानों को 5 हजार से कम नहीं मिलेगी राहत राशि

भोपाल। प्रदेश में प्राकृतिक आपदा की सूरत में 50 फीसदी से ज्यादा फसल को नुकसान होने पर अब न्यूनतम पांच हजार रुपए प्रति हेक्टेयर राहत मिलेगी। यह राशि अभी तक दो हजार रुपए थी। साथ ही अधिकतम राहत राशि 1 लाख 20 हजार रुपए तक हो सकती है।

इसके लिए मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में फैसला लिया गया। इसके अलावा 30 शहरों में 43 नई तहसीलें बनाने और इनके लिए पदों की मंजूरी दी गई। सरकार 550 नायब तहसीलदार की भर्ती भी करेगी।

मंत्रालय में हुई कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि किसानों को पहले लागत के हिसाब से राहत नहीं मिल पाती थी। इसे देखते हुए सरकार ने तय किया है कि पचास फीसदी से ज्यादा फसल को नुकसान होने की सूरत में न्यूनतम पांच हजार और अधिकतम एक लाख बीस हजार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। राजस्व प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पांच महानगर भोपाल और इंदौर में 5-5, ग्वालियर और जबलपुर में 3-3 और उज्जैन में 2 नई तहसीलों के गठन को स्वीकृति दी गई है।

इसके अलावा एक लाख से अधिक आबादी के 25 अन्य शहरों में एक-एक तहसील बनेगी। कैबिनेट ने यह भी फैसला किया कि जिन नगरीय क्षेत्रों में आबादी एक लाख से ज्यादा होती जाएगी, वहां एक तहसील का गठन कर दिया जाएगा। हर तहसील के लिए तहसीलदार से लेकर भृत्य तक के 16 पदों को मंजूर किया गया है।

इन जिलों में बनेंगी एक-एक नई तहसील

देवास, सतना, सागर, रतलाम, रीवा, कटनी, सिंगरौली, बुरहानपुर, खंडवा, मुरैना, भिंड, गुना, शिवपुरी, छिंदवाड़ा, विदिशा, छतरपुर, मंदसौर, दमोह, नीमच, होशंगाबाद, खरगोन, सीहोर, बैतूल, सिवनी और दतिया।

50 फीसदी मूलधन चुकाने पर ब्याज माफ

प्रदेश के 17 लाख 78 हजार किसानों पर चढ़े ढाई हजार करोड़ रुपए के ब्याज को सरकार माफ करेगी। इसके लिए कैबिनेट ने किसान समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इसके तहत 15 जून तक मूलधन की 50 प्रतिशत राशि जमा करने पर किसान शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज लेने के लिए पात्र हो जाएगा।

पहली बार किसान को कर्ज में वस्तु (खाद-बीज) दिया जाएगा। इस नए कर्ज में पहले के बकाया 50 प्रतिशत कर्ज की रकम को शामिल कर दिया जाएगा। पहली किस्त चुकाने वाला किसान ही योजना के दायरे में आएगा। ऐसे किसानों को खरीफ 2018 सीजन में नकद ऋण की मात्रा आधे मूलधन से ज्यादा नहीं होगी। रबी सीजन से यह बंधन भी खत्म हो जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त एपी श्रीवास्तव ने पूछा कि इस योजना में सहकारिता विभाग की भागीदारी क्या है। इस पर सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव केसी गुप्ता ने कहा कि 20 प्रतिशत खर्च सहकारी संस्थाएं उठाएंगी। बाकी 80 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी।

बिना खास चर्चा प्रोत्साहन योजना हो गई मंजूर

बैठक में पिछले साल गेहूं और धान बेच चुके किसानों को 200 रुपए प्रति क्विंटल उत्पादकता प्रोत्साहन देने की योजना बिना खास चर्चा के मंजूर हो गई। कृषि विभाग की ओर से प्रस्ताव रखा गया, जिसका सभी ने समर्थन किया। इसके साथ ही मौजूदा सीजन में गेहूं पर प्रति क्विंटल 265 रुपए देने की योजना पर भी निर्णय हो गया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने ही इसका आकलन कराने की बात रखी तो मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सबको देने का तय हो गया तो फिर कोई बात ही नहीं है। अब चाहे गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बिके या अधिक पर, कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकार अपनी ओर से 265 रुपए प्रति क्विंटल देगी। चना, मसूर और सरसों पर भी सरकार प्रति क्विंटल 100 रुपए प्रोत्साहन राशि देगी।

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