पीएम की सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त, हारी लड़ाई लड़ रहे माओवादी : राजनाथ

जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर है। नक्सली जंग हार चुके हैं और हारने वाली लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका प्रभाव अब 135 जिलों से घटकर 90 जिलों में रह गया है। लेकिन वे ज्यादा सक्रिय सिर्फ 10 जिलों में रह गए हैं।
यह बोले नेता
पत्र सामने आने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि मोदी विरोध के नाम पर नक्सलियों का सहयोग लेने वाले शेर की सवारी कर रहे हैं। वे हिंसा के सहारे न सिर्फ सरकार बल्कि पूरी संवैधानिक प्रणाली को ध्वस्त करना चाहते हैं।
वहीं कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस मामले की राजनीति से ऊपर उठकर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस को आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद कतई कबूल नहीं है।
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी बोले कि पीएम मोदी की हत्या की साजिश पर कांग्रेस को राजनीति बंद करनी चाहिए। देश की जनता का आशीर्वाद प्रधानमंत्री के साथ है, उनको कुछ नहीं होगा।
यह हुआ था खुलासा
दरअसल, शुक्रवार को माओवादियों की एक चिट्ठी सामने आई जिसमें राजीव गांधी की हत्या जैसी एक और साजिश रचने का प्लान सामने आया। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार रोना विल्सन के घर से बरामद एक पत्र से पता चलता है कि माओवादी राजीव गांधी की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश रच रहे थे।
पुलिस के अनुसार, इस पत्र में कहा गया है कि मोदी को किसी रोड शो के दौरान निशाना बनाया जा सकता है। यह पत्र किसी कामरेड प्रकाश को संबोधित है। पत्र भेजने वाले ने अपना परिचय “आर” के रूप में दिया है। इसमें उसने एम-4 राइफल और चार लाख राउंड गोलियां खरीदने के लिए आठ करोड़ रुपये की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि हिंदू फासीवाद को हराना हमारा मुख्य एजेंडा रहा है। संगठन में कई नेताओं ने जोरदार तरीके से यह मुद्दा उठाया है। मोदी के नेतृत्व में फासीवादी ताकतें आगे बढ़ती जा रही हैं। इसके चलते आदिवासियों का जीना मुहाल हो गया है। बिहार और पश्चिम बंगाल में करारी हार मिलने के बावजूद मोदी 15 से अधिक राज्यों में भाजपा की सरकार बनवाने में कामयाब रहे हैं। यदि यह सब जारी रहा, तो पार्टी को हर मोर्चे पर बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ जाएगा।
कामरेड प्रकाश और कुछ अन्य वरिष्ठ कामरेडों ने मोदी राज खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है। हम राजीव गांधी की तर्ज पर कुछ करने की सोच रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 21 मई, 1991 को चुनाव प्रचार के दौरान लिट्टे ने आत्मघाती हमला कर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी।
पत्र में कहा गया है कि यदि ऐसा होता है, तो यह आत्मघाती हमले जैसा लगेगा। हालांकि, बहुत ज्यादा संभव है कि हमें सफलता नहीं मिले। लेकिन, हमें लगता है कि पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति को हमारे प्रस्ताव पर विचार करना चाहिए। रोड शो के दौरान मोदी को निशाना बनाना प्रभावी रणनीति हो सकती है। हम सब का सामूहिक रूप से मानना है कि पार्टी सभी बलिदानों से ऊपर है।

