Thursday, April 30, 2026
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Fathers Day Special : पापा! मैं तुम्हारे साथ जीने आई थी, विदा करने नहीं

प्यारे पापा ! मेरे धरा पर आने के बाद यह पहला ‘पितृ दिवस’ है। तुम्हारी गोद में खेलने का जी कर रहा है। तुम्हारी पप्पी अपने माथे और गालों पर महसूस करना चाहती हूं।

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चाहती हूं कि तुम मुझे दोनों हाथों से उछालो और मैं आसमान में खिलखिलाते हुए फिर तुम्हारे दोनों हाथों पर आ गिरूं। तुम घोड़े बन जाओ और मैं तुम्हारी सवारी करूं। तुम्हारी नाक पकड़कर खींचूं, तुम्हारी शर्ट गंदी करूं। तुम सो रहे हो और मैं तुम्हारे सीने पर चुपचाप चढ़ जाऊं। तुम अचकचा कर उठो और भर लो मुझे बाहों में। तुम्हें देखे हुए पांच दिन हो गए पापा! तुम कहां गायब हो! किसी से पूछ नहीं सकती, लेकिन मैं तुम्हें रात-दिन तलाश रही हूं।

कोई आता है तो लगता है तुम आ ही गए हो। कहीं कोई घंटी बजती है तो लगता है तुम पूजा कर रहे हो। कोई किसी को समझाता-बुझाता है तो लगता है तुम थके-हारों को सहारा दे रहे हो। कोई लोरी सुनाई देती है तो लगता है तुम ही गा रहे हो। घर में तुम्हारा बड़ा-सा चित्र देखती हूं तो लगता है बस कुछ ही पलों में तुम इससे निकलकर बाहर आ जाओगे। सीधे मेरे पास। मुझे भूख लगती है तो मैं रोती हूं। मम्मा मुझे दूध पिलाती हैं। तुम्हारे जाने के बाद से तो सभी रो रहे हैं। मां के आंसू बार-बार मेरे गालों पर गिरते हैं। दीदी को भी देखती हूं तो वे भी रोती रहती हैं। क्या सभी भूखे हैं? ये लोग तो मुझसे बड़े हैं। इन्हें तो बहुत भूख लगी होगी! क्या तुम इनके लिए खाना लेने गए हो?

तुम्हारे जाने के बाद से दादी आसमान की ओर देख रही हैं। तुम आसमान की तरफ थोड़ी न गए होंगे! तुम्हारे जाने के बाद से घर में लोगों का मेला लगा हुआ है। जैसे सारे लोग तुम्हें यहीं खोज रहे हैं। सुबह से शाम तक तुम्हारी ही तलाश चलती है और तुम्हारी ही बात होती है। पुलिस अंकल भी यहीं आकर तुम्हारी बातें करते हैं। तुम घर में होते तो मिल ही गए होते न! मैं सबसे चिल्ला-चिल्लाकर कहती हूं कि पापा यहां नहीं हैं। उन्हें कहीं और ढूंढो, लेकिन कोई मेरी बात सुनता-समझता ही नहीं। लोग कहते हैं कि तुम मम्मा से नाराज होकर गए हो। कुछ कहते हैं कि दीदी की वजह से चले गए। पैसे की तंगी, कर्जे, आश्रम और झगड़ों की वजह से गए। इसमें मेरी क्या गलती पापा?

मैंने तो तुम्हें कभी तंग नहीं किया। हमेशा तुमको प्यार किया। तुम मुझे उठाते थे और मैं तुम्हारे गल्लू पकड़ लेती थी। कम से कम मेरे लिए आ जाओ। कुहू दीदी की मम्मी नाराज होकर गई थीं तो तुम उनकी मां बन गए थे, क्या अब मेरी मां को पापा बनना पड़ेगा? कम से कम कुहू दीदी के बारे में सोचा होता। अब तो उनके पास न मां हैं, न पापा हैं। सब कहते रहते हैं कि अब तुम कभी नहीं आओगे। वहां चले गए हो, जहां से कोई लौटकर नहीं आता।

तो क्या मुझे अब तुम्हारे बिना ही बड़ा होना पड़ेगा! मैं चलना सीखूंगी तो तुम्हारी अंगुली नहीं मिलेगी! बोलना सीखूंगी तो तुम्हें आवाज नहीं लगा पाऊंगी! स्कूल जाऊंगी तो पैरेंट्स-टीचर मीट में तुम नहीं चलोगे! कॉलेज जाऊंगी तब भी अकेले ही! कोई भी जब तुम्हारे बारे में पूछेगा तो चुप हो जाया करूंगी! पापा, मैं तुम्हारे साथ जीने आई थी, तुम्हें विदा करने नहीं। तुम्हारे साथ मुस्कराने आई थी, घरभर की मुस्कराहट छीनने नहीं। तुम्हें और मम्मा को जोड़ने आई थी, तोड़ने नहीं। चार माह की बिटिया को कोई ऐसे छोड़कर जाता है! प्लीज आ जाओ न पापा!

तुम्हारी प्यारी धारा

 

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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