नेस्ले-कोका कोला का विदेश में अलग, भारत में अलग नियम? FSSAI के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: जानिए पैकेट पर ‘रेड अलर्ट’ से क्यों पीछे हटा रेगुलेटर

पैकेज्ड फूड पर चेतावनी का विवाद: भारत में रंगीन चेतावनी से क्यों पीछे हटा FSSAI और क्यों उठे सवाल?

नेस्ले-कोका कोला का विदेश में अलग, भारत में अलग नियम? FSSAI के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: जानिए पैकेट पर ‘रेड अलर्ट’ से क्यों पीछे हटा रेगुलेटर

क्या भारत में बिकने वाले पैकेज्ड फूड और कोल्ड ड्रिंक्स के मानक विदेशों से अलग हैं? पैकेट खोलते ही चिप्स, नूडल्स या बिस्कुट के स्वाद में खो जाने वाले करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़ा एक बड़ा विवाद अब सामने आया है। पैकेज्ड फूड पर हाई शुगर, हाई सॉल्ट और हाई फैट की साफ लाल चेतावनी (Front-of-Pack Red Alert) लगाने की योजना से भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अचानक पीछे हटने पर बवंडर खड़ा हो गया है।

एक तरफ वैश्विक दिग्गज फूड कंपनियाँ हैं, तो दूसरी तरफ देश के नागरिकों का स्वास्थ्य। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद यह सवाल गहरा गया है कि क्या भारतीय नागरिकों की सेहत के मुकाबले कंपनियों का मुनाफा भारी पड़ रहा है? आइए समझते हैं इस पूरे ‘रेड अलर्ट’ विवाद, कंपनियों के दोहरे रवैये और अदालत के कड़े रुख की पूरी कहानी।

मार्च 2026 की बैठक में कंपनियों के तर्क और दोहरे मानक

FSSAI के यू-टर्न पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

भारत बनाम विदेश: पैकेट के अंदर कितना अंतर?

प्रोडक्ट / ब्रांड भारत में स्थिति विदेश में स्थिति (UK/Aus)
फैंटा (Fanta) 3 गुना ज्यादा चीनी और विवादित आर्टिफिशियल कलर कम कैलोरी और सख्त हेल्थ चेतावनी नियम
किटकैट (KitKat) मात्र 4.5% कोको सॉलिड्स ऑस्ट्रेलिया में न्यूनतम 22% कोको
मैगी नूडल्स (Maggi) सस्ते पाम ऑयल (Palm Oil) से निर्माण ब्रिटेन में महंगे सनफ्लॉवर ऑयल से निर्मित

(नोट: कंपनियों का कहना है कि वे स्थानीय स्वाद, लागत और नियमों के हिसाब से उत्पादों की रेसिपी में बदलाव करती हैं।)

भारत में यह जंग क्यों है इतनी अहम?

  1. 100 अरब डॉलर का बाजार: भारतीय पैकेज्ड फूड मार्केट के करीब 80% उत्पाद हाई फैट, शुगर या सॉल्ट (HFSS) की श्रेणी में आते हैं। कंपनियों को डर है कि लाल चेतावनी लगने पर लगभग पूरा बाजार ही ‘रेड ज़ोन’ में नज़र आने लगेगा।

  2. सेहत का बढ़ता जोखिम: WHO और ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान के मुताबिक, HFSS उत्पादों का अधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज, बीपी और दिल की बीमारियों को बढ़ा रहा है।

असली मुद्दा यही है कि पैकेट खरीदने से पहले ग्राहक को उसके अंदर मौजूद स्वास्थ्य जोखिम की जानकारी साफ अक्षरों में सामने दिखाई दे या फिर पैकेट के पीछे लिखे बारीक अक्षरों तक सीमित रहे। नेस्ले-कोका कोला का विदेश में अलग, भारत में अलग नियम? FSSAI के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: जानिए पैकेट पर ‘रेड अलर्ट’ से क्यों पीछे हटा रेगुलेटर

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