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Sting Energy Drink: FSSAI की सख्ती के बाद पेप्सिको का बड़ा कदम, ‘Sting’ के कैन और बोतलों से हटेगा ‘Energy’ शब्द

Sting No More An Energy Drink: पेप्सिको ने 'स्टिंग' से हटाया 'Energy' शब्द, FSSAI की डेडलाइन से पहले उठाया बड़ा कदम

Sting Energy Drink: FSSAI की सख्ती के बाद पेप्सिको का बड़ा कदम, ‘Sting’ के कैन और बोतलों से हटेगा ‘Energy’ शब्द

नई दिल्ली: भारत के ₹13,000 करोड़ से ज्यादा के ‘एनर्जी ड्रिंक’ बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. देश के प्रमुख फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI (FSSAI) की सख्ती के बाद पेप्सिको इंडिया (PepsiCo India) ने अपने लोकप्रिय ब्रांड ‘स्टिंग’ (Sting) के कैन और बोतलों के लेबल से ‘एनर्जी’ (Energy) शब्द को हटाने का फैसला किया है.

पेप्सिको ने FSSAI द्वारा दी गई 90 दिन की समय सीमा (Deadline) से पहले ही यह कदम उठा लिया है. आपको बता दें कि FSSAI ने अब ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ को एक अलग कैटेगरी के रूप में मानना बंद कर दिया है.

 FSSAI ने क्यों लिया यह फैसला?

फूड रेगुलेटर FSSAI का मानना है कि एनर्जी ड्रिंक्स की कैन पर “शरीर और दिमाग को फिर से ऊर्जावान बनाने” जैसे दावे उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं. FSSAI ने यह अनिवार्य कर दिया है कि इन पेय पदार्थों को अब ‘एनर्जी ड्रिंक’ के तौर पर प्रमोट नहीं किया जाएगा.

रेगुलेटर के इस फैसले के बाद, अब स्टिंग के सभी नए कैन और बोतलें बिना ‘एनर्जी’ शब्द के लेबल के साथ दुकानों में आएंगे.

F1 स्पॉन्सरशिप और विज्ञापनों में भी होगा बदलाव

इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, पेप्सिको न केवल स्टिंग के लेबल बदल रही है, बल्कि ब्रांड के सभी विज्ञापनों को भी नए सिरे से तैयार कर रही है.

स्टिंग की पिछले साल फॉर्मूला वन (F1) के साथ पांच साल की ग्लोबल स्पॉन्सरशिप डील हुई थी, जिसके तहत इसे “F1 का ऑफिशियल एनर्जी ड्रिंक” के रूप में प्रमोट किया जा रहा था. अब ट्रैकसाइड विज्ञापन, फैन जोन और मार्केटिंग में भी ‘एनर्जी’ शब्द का इस्तेमाल बंद किया जाएगा. Sting Energy Drink: FSSAI की सख्ती के बाद पेप्सिको का बड़ा कदम, ‘Sting’ के कैन और बोतलों से हटेगा ‘Energy’ शब्द

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 रेड बुल और अन्य कंपनियों ने मांगा समय, मार्केट में शॉर्टेज

जहाँ पेप्सिको ने नए नियमों का पालन शुरू कर दिया है, वहीं रेड बुल, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, मॉन्स्टर और हेल जैसी इस कैटेगरी की दूसरी कंपनियों ने सरकार को पत्र लिखकर 1 जुलाई से शुरू हुई अनिवार्य डेडलाइन को आगे बढ़ाने की मांग की है. इन कंपनियों का तर्क है कि उनके पास पहले से प्रिंटेड कैन और पेट बोतलों का बड़ा स्टॉक मौजूद है, जिसे बदलने के लिए और समय चाहिए.

नियमों में इस बदलाव के कारण, देश भर में डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियां एनर्जी ड्रिंक्स का मौजूदा स्टॉक लेने से मना कर रही हैं, जिससे रिटेल दुकानों पर दर्जनों ब्रांड्स की कमी दिखने लगी है.

इंडियन बेवरेज एसोसिएशन (IBA), जिसमें कोका-कोला, पेप्सिको और रिलायंस शामिल हैं, ने भी FSSAI के CEO रजित पुन्हानी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर बातचीत करने और नियम लागू करने से पहले कंपनियों को राहत देने का आग्रह किया है. 

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