Monday, May 4, 2026
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नाबालिग को बंधक बनाकर दुष्कर्म मामले में मां-बेटे को 10 वर्ष का सश्रम कारावास

कटनी। विजयराघवगढ़ थाना अंतर्गत घर से बाजार गई अनुसूचित जनजाति वर्ग की एक नाबालिग किशोरी का अपहरण कर मकान में बंधक बनाकर दुष्कर्म करने के मामले के आरोपी मां-बेटे को विशेष न्यायाधीश(अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति) संजीव पांडे की न्यायालय ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है।

सजा देने के साथ ही न्यायालय ने आरोपी मां-बेटे पर अर्थदंड भी लगाया है। जिसकी भरपाई न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। इस संबंध में मिली जानकारी विजयराघवगढ़ थाना

अंतर्गत ईंट भट्ठों में काम करने वाले 28 वर्षीय अनिल पिता ताराचंद विश्वकर्मा ने साथ में काम करने वाली अनुसूचित जनजाति वर्ग की एक नाबालिग किशोरी का उस समय अपहरण कर लिया था। जब वह घर से बाजार करने निकली थी।

किशोरी का अपहरण करने के बाद आरोपी उसे अपने घर ले गया। जहां अपनी मां 60 वर्षीय गंगाबाई पति ताराचंद विश्वकर्मा की मदद से बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। उधर पीडि़त परिजन पहले तो अपने स्तर पर किशोरी की खोजखबर लेते रहे लेकिन जब उसका कहीं कोई पता नहीं चला तो इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने गुमइंसान कामय करते हुए संदेही अनिल विश्वकर्मा के घर दबिश देकर किशोरी को उसके चंगुल से मुक्त कराया और फिर मेडिकल परीक्षण कराने के बाद आरोपी मां-बेटे पर धारा संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए प्रकरण सुनवाई के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया।

बताया जाता है कि मामले की सुनवाई समाप्त होने के बाद विशेष न्यायाधीश(अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति) संजीव पांडे की न्यायालय ने आरोपी मां-बेटे को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया है। इसके अलावा न्यायालय ने बेटे अनिल विश्वकर्मा पर 3500 रूपए व मां गंगाबाई पर 2500 रूपए का अर्थदंड भी लगाया है। जिसकी भरपाई न करने पर अलग से सजा भुगताने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है।

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता जे.एल.चौधरी व आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रदीप तिवारी ने पैरवी की।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम