नहीं बैठ रहा मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल का संतुलन, अब दिल्ली में फैसला
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल विस्तार की उल्टी गिनती तो शुरू हो गई, लेकिन अजा-अजजा, ओबीसी और सामान्य वर्ग के बीच संतुलन नहीं बैठ पा रहा है। सत्ता और संगठन की चर्चा के बाद सूची तैयार हो गई है, लेकिन इस पर अब अंतिम मुहर दिल्ली में बड़े नेताओं से चर्चा के बाद ही लगेगी।
मुख्यमंत्री चौहान सूची लेकर गुरुवार शाम को पहले भोपाल से तिरुपति जाएंगे, वहां से वे दिल्ली पहुंचेंगे। संभावना जताई जा रही है कि मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन की अस्वस्थता के चलते जल्द ही केंद्र सरकार मप्र का प्रभार किसी अन्य राज्य के राज्यपाल को सौंप सकती है। इसके बाद शपथ की तारीख तय होगी। इस विषय पर बुधवार सुबह मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री से विस्तार से चर्चा की। देर शाम चौहान भाजपा मुख्यालय पहुंचे, जहां मंत्रिमंडल को लेकर दोबारा चर्चा हुई।
भाजपा सरकार में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक लगभग नौ पूर्व विधायकों को शपथ दिलाई जा सकती है। शिवराज कैबिनेट में फिलहाल दो सिंधिया समर्थक मंत्री हैं। सिंधिया ने कांग्रेस के 22 विधायकों का साथ लेकर कमल नाथ सरकार गिराई थी। इसके एवज में प्रभुराम चौधरी, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसौदिया, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंषाना, हरदीप सिंह डंग, राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव और रणवीर जाटव मंत्रिमंडल के संभावित दावेदारों में शामिल हैं।
सामान्य वर्ग में भी भारी कश्मकश
सामान्य वर्ग में गोपाल भार्गव, रामपाल सिंह, उषा ठाकुर, रमेश मेंदोला, चेतन्य काश्यप, यशपाल सिंह सिसौदिया, अरविंद भदौरिया, अशोक रोहाणी, राजेंद्र शुक्ला या गिरीश गौतम, रामेश्वर शर्मा या विश्वास सारंग के नाम दावेदारों की सूची में शामिल हैं। इसी तरह ओबीसी में भूपेंद्र सिंह, यशोधरा राजे सिंधिया, रामकिशोर कांवरे, रामखिलावन पटेल, भारत सिंह कुशवाह, रामलल्लू वैश्य, अजय विश्नोई के नाम चर्चा में शामिल हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार के मामले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत से विस्तार से चर्चा हुई है। सभी पहलुओं पर विचार किया गया है। अब दिल्ली में भी चर्चा होगी। मंत्रिमंडल का विस्तार जल्दी ही किया जाएगा।

