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दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो है, ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया… राहत इंदौरी की जबलपुर से जुड़ी यह याद

जबलपुर। प्रसिद्ध शायर डॉ. राहत इंदौरी का इंदौर में मंगलवार शाम करीब पांच बजे निधन हो गया। अंतिम सांस के साथ ही अब वे ‘जमींदार” हो गए हैं। दरअसल, शायरी के लंबे दौर में उन्होंने कभी कहा था-

कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया, इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया।

दो गज सही ये मेरी मिलकियत तो है, ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।

इस शेर में जमींदार होने से उनका आशय था कि जिस जमीन में उन्हें दफनाया जाएगा, वह भले ही दो गज की हो, मगर हमेशा के लिए उनकी मिलकियत (संपत्ति) हो जाएगी। उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। कोरोना से संक्रमित होने की जानकारी राहत इंदौरी ने खुद ट्वीट कर दी थी।

जबलपुर 207 में आये थे

दिवगंत राहत इन्दोरी 2007 में जबलपुर आये थे।पकंज जैन के साथ कार में जबलपुर भ्रमण के दौरान।यह चित्र यशभारत को श्री जैन ने उपलब्ध कराया।

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प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शाम को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। उनके दोनों फेफड़ों में कोरोना का संक्रमण और किडनी में सूजन थी।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम