मध्यप्रदेश

देश के नामी वकील तन्खा ने पार की प्रदेश कांग्रेस की नैया

कांग्रेस की नैया के खिवैया बने विवेक तन्खा
जबलपुर प्रतिनिधि। यूं तो प्रदेश कांग्रेस में कमलनाथ और सिंधिया जैसे बड़े नेताओं की कमी ना थी बावजूद इसके पन्द्रह सालों से पार्टी सत्ता से बाहर रही । प्रदेश का कांग्रेस कार्यकर्ता दुबारा सत्ता पर वापसी की उम्मीद खोकर हतोत्साहित था, लेकिन इस बीच पार्टी को साथ मिला ऐसी शख्सियत का जिसका नाम पूर्व में देश के नामी वकीलों में शुमार होता था जिसने देश के सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी कई उपलब्धियां हासिल की उसने जब सक्रिय राजनीति में कदम रखा तो किसी ने भी यह उम्मीद नही की थी कि वे प्रदेश की राजनीतिक दशा और दिशा बदलकर रख देगें।यहां बात हो रही है महाकौशल क्षेत्र से राज्यसभा सांसद विवेक कृष्ण तन्खा की जिसने ना केवल महाकौशल में कई वर्षो से अपना गढ़ बना चुकी भाजपा को तहस नहस कर दिया बल्कि अपनी कुशल रणनीति से अप्रत्याशित रूप से कांग्रेस को फिर सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाया।
महाकौशल की जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन
राज्यसभा सांसद के लिए यह किसी चुनौती से कम ना था क्यूंकि महाकौशल की सभी 38 सीटों पर भाजपा का प्रभाव इतना था कि यहां से जीत की सोंच रखना महज कल्पना कही जाती थी। सांसद तन्खा ने कांग्रेस पार्टी से मिली इस जिम्मेवारी को अपनी कुशल रणनीति और कुशाग्र बुद्वि के चलते जीत की धार को कांग्रेस की तरफ मोड़ दिया जिससे खुद जहां भाजपा हतप्रभ है वही कांग्रेस भी अति उत्साह से भर गयी।
साठ लाख फर्जी वोटरों को रखा चुनाव आयोग के समक्ष
प्रदेश में भाजपा की सत्ता की राह फर्जी वोटरों की बस्ती से होकर गुजरती थी और ये संख्या लगभग साठ लाख के आसपास थी तन्खा ने चुनाव आयोग के समक्ष इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाते हुए जीत के प्रति आश्वस्त भाजपा की कमर तोड़कर रख दी।
बेखौफ लड़ाका, कुशल रणनीतिकार
महाकौशल क्षेत्र में राजनीतिक माहौल ठीक विपरीत होने के बावजूद तन्खा ने परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए कांग्रेस की जीत की राह बनानी शुरू की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत के आव्हान को झुठलाते हुए समूचा परिदृश्य ही बदलकर रख दिया बल्कि ठीक इसके इतर भाजपा की यह हालत कर दी की केन्द्र सत्ता में बैठी सरकार दलदल में फंसी नजर आ रही है।
व्यापम घोटाले का रखा मजबूती से पक्ष
भाजपा शासनकाल में हुए व्यांपम घोटाले को लेकर भी वे मुखर दिखाई दिए युवा बेरोजगारो के साथ प्रदेश सरकार द्वारा की गई इस ठगी को न्यायालय के समक्ष पुरजोर तरीके से रखते हुए सरकार की नींद हराम कर दी। व्यंापम केस का असर यह हुआ कि प्रदेश का युवा सांसद तन्खा से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में कांग्रेस के साथ आ गया और अनुभव व युवा जोश की इसी जुगलबंदी ने विधानसभा चुनाव में कमाल कर कमल उखाड़ फेंका।
चुनाव प्रचार समिति व घोषणा पत्र में योगदान
एक ओर जहां कांग्रेस ने महाकौशल की जिम्मेवारी सांसद तन्खा को सौंपी वही चुनाव प्रचार समिति का अहम सदस्य भी बनाते हुए उनकी जिम्मेवारी बढ़ा दी। तन्खा का योगदान कांग्रेस द्वारा जारी किए गए घोषणा पत्र में भी दिखा आज प्रदेश में सत्ता के सिंहासन पर बैठी कांग्रेस की सत्ता की राह इसी घोषणा पत्र के प्रभाव के चलते एक बड़ी जीत के रूप में आसान हो पायी।
सभी को साधने में माहिर
देश के नामी वकील होने के नाते सांसद तन्खा के संबंध सभी पार्टियों के नेताओं से अच्छे है। कांग्रेस नेता होने के बाद भी उनका सम्मान सभी पार्टियों के नेता करते है। इनका प्रभाव इतना है कि अगर वे अपनी बात रखते है तो सभी का ध्यान उसी ओर रहता है।
व्यांपम घोटाले को उजागर करने वालों को मिला तन्खा का साथ
व्यांपम घोटाला उजागर करने वालेआनंद रॉय, आशीष चतुर्वेदी और प्रशांत पाण्डे को जिस समय घोटालेबाजों की ओर से लगातार धमकियां मिल रही थी और उनकी जान पर खतरा बना हुआ था उस समय सांसद तन्खा का साथ इनके लिए संजीवनी साबित हुआ। इन आरटीआई एक्टिविस्ट का हौसला बढ़ाने की दिशा में तन्खा ने सभी को तात्कालिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी से मिलवाया।
लोकतंत्र के सजग प्रहरी की भूमिका
जबलपुर में सांसद तन्खा द्वारा आयोजित विधि विमर्श का आयोजन ऐसे समय आया जब लोगों को लोकतंत्र पर खतरा मंडराता नजर आ रहा था। इस आयोजन की प्रतिध्वनि केन्द्र सरकार के कानों तक भी पहुंची थी जिसके चलते उन्हें अपने बेखौफ साथियों पर लगाम लगाने मजबूर होना पड़ा।
ट्वीटर के माध्यम से बनाया दबाव
सांसद तन्खा का ट्विटर एकांउट पर नजर जहां कांग्रेसी व आम लोगों की रहा करती थी वही भाजपा के नेता भी उनके ट्विटर पर अपनी नजर बनाए हुए थे यह उनक ी दबाव बनाने की रणनीति का अहम हिस्सा था जिसमें वे पूर्णत सफल साबित हुए।
विधि विशेषज्ञों क ा भरपूर उपयोग
प्रदेश के चुनावों में इससे पूर्व विधि विशेषज्ञों का योगदान नगण्य रहा करता था लेकिन तन्खा ने इनको लेकर एक टीम का गठन किया और इनके माध्यम से चुनावी समर में महाकौशल की सभी सीटों पर प्रभावी रूप से विजय हासिल की।
महाकौशल की बढ़ी आस
तन्खा की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से महाकौशलवासियों को एक सशक्त नेता मिल गया। इसको इसी से बेहतर ढंग से समझा जाता है कि प्रदेश कांग्रेस छत्रपों सिंधियां, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के साथ बंद कमरे में चौथे नेता के रूप में मौजूदगी और सरकार बनाने के दावे के समय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के समक्ष उपस्थिति कांग्रेस के लिए महाकौशल के विजयी रथ को आगे बढ़ाने की दिशा में शुभ संकेत कहा जा सकता है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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