दीवाली के बाद वेटरनरी विश्वविद्यालय में लोकायुक्त कर सकती है कार्रवाई
जबलपुर। वेटरनरी विश्वविद्यालय में लगातार बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के टेंडर जारी होते हैं, लेकिन ठेकेदार ही नहीं मिलते आमतौर पर देखा गया है कि किसी भी संस्थान में टेंडर निकलते ही ठेकेदारों में काम हासिल करने की होड़ लगी रहती है। लेकिन वेटरनरी विश्वविद्यालय में ऐसे कई टेंडर निकाले गए जिन्हें हासिल करने ठेकेदारों ने कोई दिलचस्पी नही दिखाई उनकी इस अनदेखी का कारण पूछे जाने पर इनका कहना है कि भाई कुछ भी कर लो सिंह साहब तो अपने चहेतों को ही टेंडर दिलवाएगें।
कार्यपालन यंत्री ए के सिंह की भूमिका संदिग्ध
ठेकेदारों ने कार्यपालन यंत्री ए के सिंह पर चहेतों को उपकृत करने का आरोप लगाते हुए कहते है कि विटनरी द्वारा जारी टेंडर में इतनी ज्यादा कमीशन खोरी की जाती है कि उनके पास कुछ भी पैसा नहीं बचता अर्थात घाटे में काम करने से अच्छा है कि टैंडर ही ना लिया जाए।
अपने चहेते 2 ठेकेदारों को ही दिया जाता है ठेका
कार्यपालन यंत्री ए के सिंह ने अभी तक सिर्फ अपने दो ही ठेकेदारों को वेटरनरी विश्वविद्यालय का ठेका दिया है नए ठेकेदारों को मौका नहीं दिया जा रहा है और इन ठेकेदारों से इतना ज्यादा कमीशन मांगा जाता है जिसमें की नए ठेकेदार ठेका लेने से पीछे हट जाते हैं
2 साल पूर्व निर्मित भवन की मरम्मत का पुन: ठेका जारी
कार्यपालन यंत्री ए के सिंह के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण है कि 2 साल पूर्व हाउसिंग बोर्ड द्वारा एक बिल्डिंग का निर्माण किया गया था परंतु उसके बाद बिल्डिंग के मरम्मत के नाम से पुन: ठेका निकाल दिया गया। जिससे सवाल खड़े हो रहे है कि या तो पूर्व निर्माण में कोताही बरती गईऔर घटिया सामग्री का उपयोग कर बिल्डिंग तान दी गई जिसके कारण अब दो वर्षो के अंतराल में ही मरम्मत की आवश्कता पड़ गई।
दाल में कुछ तो काला है
वहीं टेंडर के नाम पर जो पर्याप्त भ्रष्टाचार किया जा रहा है , उसे देख कर यही लगता है कि सिर्फ कार्यपालन यंत्री ही नहीं वेटनरी के बड़े अधिकारी व जिम्मेवार भी ठेके के इस खेल में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे है। वेटनरी प्रशासन पर भ्रष्टाचार के इन आरोपों की हकीकत जानने जब हमने वेटनरी प्रशासन से वर्क कमेटी के चेयरमेन एस के परमार को जब फोन लगाया गया तो उनके द्वारा फोन रिसीव नही किया गया।
लोकायुक्त करेगी कार्यवाही
पिछले 1 महीने में विटनरी प्रशासन सतत् रूप से विवादों में था, जिसमें कुलपति एवं कुलसचिव का विवाद लोकायुक्त तक पहुंच गया था जिसमें की कुलसचिव द्वारा कुलपति पर भ्रष्टाचार के विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए गए थे और इसकी शिकायत लोकायुक्त में की थी। सूत्रों के अनुसार अगले सप्ताह लोकायुक्त वेटरनरी विश्वविद्यालय में जांच के लिए जा सकता है ।
जिम्मेदार अधिकारियों से होगी पूछताछ
लोकायुक्त को अभी तक भ्रष्टाचार में लिप्त वेटनरी के ग्यारह अधिकारियों की शिकायत प्राप्त हुई हैँ। जिसको लेकर लोकायुक्त कभी भी इन आला अधिकारियों से पूछताछ कर सकता है।
इनका कहना है
विभाग को इस तरह की सत्रह शिकायतें मिली हुई है जिसमें वेटनरी में नियमविरूद्व नियुक्तियां सहित अधिकारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली है जिसकी समीक्षा की जा रही है और बहुत जल्द जांच के परिणाम आपके सामने आएगें ।
अनिल विश्वकर्मा
लोकायुक्त एसपी

