जबलपुर। सोमवार को सामान्य प्रशासन समिति की बैठक के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष मनोरमा पटेल और जिला पंचायत सीईओ हर्षिका सिंह के बीच हुआ विवाद कहीं न कहीं राजनीति से प्रेरित दिखाई दिख रहा है।
जिसमें दो स्वसहायता समूहों महालक्ष्मी और नर्मदा के पीछे कहीं न कहीं राजनैतिक वर्चस्व व राजनैतिक स्वार्थ की बातें सामने आ रही हैं। मौके से मिली जानकारी के अनुसार एक समूह के लोग कहीं न कहीं सत्ता पक्ष से जुड़े हुए हैं तो दूसरे पक्ष के समूह विपक्षी दल कांग्रेस समॢथत माने जाते हैं। जो पूरी तरह से विवाद की जड़ बना हुआ है। यह कोई नया मामला नहीं है जब आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते शिकवे शिकायतें हुई हों, इसके पहले भी कई दफा शिकायतों का दौर चल चुका है लेकिन सोमवार को मामला बिगड़ गया।
यह है मामला
सोमवार को जिला पंचायत कार्यालय में सामान्य सभा की बैठक के दौरान पनागर अंतर्गत रिठौरी गांव में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष और सीईओ आमने सामने आ गईं। मामला इतना बिगड़ा कि दोनों ने एक दूसरे पर अभद्र भाषा के प्रयोग का आरोप लगा दिया। उसके बाद अधिकारी अध्यक्ष की शिकायत करने कलेक्टर के पास तक जा पहुंचे।
कर्मचारियों ने दिया ज्ञापन
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जिला पंचायत के कर्मचारी व अधिकारी पूरी तरह से सीईओ हर्षिका सिंह के साथ खड़े दिख रहे हैं जिसको लेकर मंगलवार को सभी कर्मचारी अधिकारी जिला पंचायत भवन के सामने एकत्रित हुए और मामले के विषय में ज्ञापन तैयार करके कलेक्टर छवि भारद्वाज को दिया। समाचार लिखे जाने तक अधिकारी कर्मचारी अपने कार्यालय में काम करने नहीं पहुंचे थे वहीं सीईओ का कहना है कि विवाद से कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कार्यालयीन काम यथावत संचालित होंगे।
पहले से है विवाद
जिला पंचायत में अध्यक्ष और सीईओ के बीच यह पहले विवाद नहीं है। इसके पहले कई बार विवाद की स्थिति निर्मित हुई लेकिन वह सामने नहीं आ पाया। जिला पंचायत अध्यक्ष मनोरमा पटेल का कहना है कि जब से मैडम ने पदभार संभाला है वे अपनी मर्जी से काम कर रही हैं। उनके द्वारा कई अनियमितताएं की गई हैं जिसकी मैंने अलग-अलग स्तर पर शिकायत की थी जिसके चलते मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।
नियमों से हो रहा काम
इस पूरे मामले पर सीईओ हर्षिका सिंह का कहना है कि जिला पंचायत में सभी काम नियमों के हिसाब से होते हैं उनका अध्यक्ष के साथ किसी भी तरह का मतभेद नहीं है। स्वसहायता समूह की शिकायत आई हुई थी जिसको लेकर तीसरे पक्ष के एक आईएएस अधिकारी से जांच कराई गई थी ताकि कोई भी भेदभाव का मामला सामने न आ सके। और जो भी काम दिया गया है वह नियमों के आधार पर ही दिया गया है। बैँठक में इस स्वसहायता समूह का विषय शामिल किया गया था। लेकिन वे 10वें नम्बर पर था।
