जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड: सुनवाई से हटे जस्टिस शील नागू, अब CJI सूर्य कांत तय करेंगे नई बेंच
स मामले की सुनवाई कौन सी नई बेंच करेगी। यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील घनश्याम उपाध्याय की ओर से दायर की गई है
जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड: सुनवाई से हटे जस्टिस शील नागू, अब CJI सूर्य कांत तय करेंगे नई बेंच
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास से भारी मात्रा में कैश बरामदगी मामले में दायर नई जनहित याचिका पर सुनवाई टल गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया है।
जस्टिस शील नागू के हटने के बाद अब इस याचिका को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के पास भेज दिया गया है। अब CJI ही यह तय करेंगे कि इस मामले की सुनवाई कौन सी नई बेंच करेगी। यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील घनश्याम उपाध्याय की ओर से दायर की गई है।
जस्टिस शील नागू ने क्यों खुद को किया अलग?
मामले की जांच प्रक्रिया से जुड़ाव ही जस्टिस शील नागू के हटने की मुख्य वजह मानी जा रही है:
जांच कमेटी के अध्यक्ष थे नागू: पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने मामले की इन-हाउस जांच के लिए 3 जजों की समिति बनाई थी। इस समिति के अध्यक्ष खुद जस्टिस शील नागू थे।
समिति के अन्य सदस्य: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जी.एस. संधावलिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जज जस्टिस अनु शिवरामन इस समिति की सदस्य थीं।
निष्पक्षता का नियम: चूंकि जस्टिस शील नागू पूर्व में इस मामले की जांच समिति का नेतृत्व कर चुके थे, इसलिए न्यायिक सुचिता और निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सुनवाई से हटने का फैसला किया।
क्या था पूरा मामला? (होली की रात मिला था नोटों का ढेर)
स्टोररूम में आग और खुलासा: मार्च 2025 में होली की रात दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास के स्टोररूम में अचानक आग लग गई थी। दमकलकर्मियों और पुलिस को आग बुझाने के दौरान वहां से भारी मात्रा में नकदी मिली, जिसमें से कई नोट जले हुए थे।
ट्रांसफर और इस्तीफा: विवाद के बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली से इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित कर न्यायिक कार्यों से रोक दिया गया था। जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड: सुनवाई से हटे जस्टिस शील नागू, अब CJI सूर्य कांत तय करेंगे नई बेंच
महाभियोग प्रस्ताव: जांच समिति द्वारा पद से हटाने की सिफारिश के बाद जब उन्होंने पद छोड़ने से इनकार किया, तो जुलाई 2025 में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा के 145 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर) में उनके खिलाफ महाभियोग (Impeachment) प्रस्ताव लाया गया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।