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जब अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने खड़े हुए नेता प्रतिपक्ष ही निशब्द हो गए …

भोपाल। मध्य प्रदेश की 13 वीं विधानसभा के आख़िरी सत्र के दौरान  कांग्रेस को ज़ोर का झटका ज़ोर से ही लगा था.  11 जुलाई 2013 को सदन में जो हुआ उसकी भनक कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष और कुछ हद तक बीजेपी के भी बड़े धड़े को नहीं थी.

शिवराज सरकार के लिए कांग्रेस, अविश्वास प्रस्तावलायी थी. सदन में चर्चा शुरू होना थी. जैसे ही नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह बोलने के लिए खड़े हुए उन्हीं की पार्टी के उपनेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह ने प्रस्ताव का विरोध कर दिया. चौधरी ने कहा, उत्तराखंड में गुम हुए तीर्थयात्रियों और राघवजी का मुद्दा  इसमें शामिल नहीं तो ये कैसा अविश्वास प्रस्ताव.

चौधरी राकेश सिंह के इस दांव ने कांग्रेस को चारों खाने चित कर दिया. बस उसके बाद सदन में हंगामा कट गया.   विधानसभा अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी और उसी के साथ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव धरा का धरा रह गया.
Ajay Singh Rahul
दरअसल ये चौधरी राकेश सिंह के बीजेपी में शामिल होने की पटकथा थी, जो कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव की भूमिका पर लिखी गयी थी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, चौधरी को विधानसभा से सीधे भोपाल स्थित बीजेपी मुख्यालय ले गए. वहां बकायदा बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करा दी गयी. और उधर जैसा होना तय था. कांग्रेस ने चौधरी राकेश सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया.

शिवराज सिंह चौहान  के कुल कार्यकाल में कांग्रेस उनके ख़िलाफ ये तीसरी बार अविश्वास प्रस्ताव ला रही है. 14वीं विधानसभा का ये आख़िरी सत्र है. इससे पहले कांग्रेस 2 बार अविश्वास प्रस्ताव लायी थी.  चर्चा  सिर्फ पहली बार हो पायी थी.  दूसरी बार चौधरी राकेश सिंह ने हवा निकाल दी थी. अब तीसरी बार क्या होता है ये देखना है.

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