चुनाव से पहले जातियों की गणित में लगी BJP और कांग्रेस
भोपाल। मध्य प्रदेश में चुनावों से पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों की सभी जातियों को साधने में लगी हैं. दोनों ही पार्टियों के सामने परेशानी ये है कि एक खास वर्ग को साधने के चक्कर में बाकी वर्ग नाराज़ न हों. दोनों पार्टियां अलग-अलग रणनीति बनाना शुरु कर चुकी हैं. जिससे सवर्णों, दलितों, पिछड़ो को बराबर अहमियत और हिस्सेदारी मिल जाए.
दरअसल, प्रदेश में 2 अप्रैल को दलित आंदोलन और 10 अप्रैल को बंद की महज़ अफवाह के बाद हुए असर से बीजेपी और कांग्रेस दोनों को समझ आ गया है कि किसी भी वर्ग को नाराज नहीं किया जा सकता, क्योंकि अगर एकतरफा फैसला लिया तो चुनावों पर इसका सीधा असर दिखाई देने लगेगा. ऐसे में दोनों पार्टियां रणनीति बनाने में लगी हैं कि सभी वर्गों को साधा कैसे जाए.
1- संघ की समन्वय की बैठक में ज़िक्र हुआ कि दलितों के साथ सवर्णों पर भी पार्टी को ध्यान देना है. कोई भी वर्ग नाराज़ नहीं होना चाहिए.
2- 12 अप्रैल को बीजेपी ने महात्मा ज्योतिबा फूले की जयंती के मौके पर पिछडा मोर्चे ने प्रदेश भर में कार्यक्रम करने का फैसला लिया है. जिसमें पार्टी ओबीसी वर्ग के लिए चलाई जा रही योजनाएं बताएगी.
3- सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी एक्ट के बदलाव के बाद हुए हंगामे से परेशान पार्टी ने सांसदों और जनप्रतिनिधियों को एक रात दलित के घर गुज़ारने का फरमान भी सुना दिया है.
4- सवर्णों को साधने के लिए पार्टी अपने बड़े पदों पर सवर्णों को लेकर आ सकती है.
5- कांग्रेस ने भी आंदोलन के बाद खुलकर न दलितों का समर्थन किया और न हि सवर्णों का समर्थन किया। ज़ाहिर है कि पार्टी स्टैंड लेने से घबरा रही है.
6- प्रमोशन में आरक्षण के मामले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन लगाई है जिसपर दोनों ही पार्टियां चर्चा से बचती हैं.
मामले में बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस और अन्य दल बीजेपी की सभी वर्गों में घुसपैठ देखकर घबरा गए हैं और माहौल बिगाड़ने का काम कर रहे हैं.
जातिगत गणित
1- प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं.
2- इन 230 सीटों में 35 एससी यानि कि शेड्यूल कास्ट के लिए रिज़र्व हैं.
3- 47 सीटें एसटी यानि कि आदिवासी प्रत्याशियों के लिए रिज़र्व हैं.
4- यानि SC/ST की कुल 82 सीटों को लेकर कांग्रेस-बीजेपी फोकस करती रही हैं.
5- मध्यप्रदेश की जनसंख्या में कुल मिलाकर एससी 15.6%, एसटी 21.1% हैं.
6- कुल 36.7% SC/ST वोट कोई भी सरकार बनाने और गिराने का माद्दा रखता हैं.
कांग्रेस के मुताबिक उनकी पार्टी जातिगत आधार पर वर्गीकरण नहीं करती. कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जिसमें सवर्ण ही पिछड़ों को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं.
प्रदेश की जातिगत व्यवस्था को मद्देनज़र रखते हुए दोनों ही पार्टियां प्लानिंग करती हैं लेकिन एक ओर का झुकाव दूसरे पक्ष को नाराज़ नहीं कर दे ये बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. जो कि आने वाले चुनावों में बड़ा फैक्टर साबित होगा.

