Sunday, May 10, 2026
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वरिष्ठ नागरिकों को अब मिल सकेगी 10 हजार रुपये तक मासिक पेंशन, जानिये इस योजना की खास बातें

नई दिल्ली। वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने प्रधानमंत्री वय वंदन योजना (पीएमवीवीवाई) में महत्वपूर्ण बदलाव कर निवेश की सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने का फैसला किया है। केंद्र के इस कदम से वरिष्ठ नागरिकों को हर माह 10,000 रुपये पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। साथ ही वरिष्ठ नागरिक अब 31 मार्च 2020 तक इस योजना के सदस्य बन सकेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री वय वंदन योजना में फिलहाल निवेश की सीमा प्रति परिवार 7.5 लाख रुपये है जिसे कैबिनेट ने बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने का फैसला किया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा का कवर बढ़ जाएगा।

कैबिनेट ने प्रधानमंत्री वय वंदन योजना की सदस्यता लेने के लिए अंतिम तिथि भी चार मई 2018 से बढ़ाकर 31 मार्च 2020 करने का निर्णय किया है। केंद्र ने यह कदम वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता के तहत उठाया है।

गौरतलब है कि मार्च 2018 तक 2.23 लाख वरिष्ठ नागरिकों को इस पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। इसके तहत वरिष्ठ नागरिकों को दस साल तक हर माह न्यूनतम 1000 रुपये पेंशन मिलने की गारंटी है। इसके लिए उन्हें डेढ़ लाख रुपये जमा करने होंगे। वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना-2014 के तहत 3.11 लाख वरिष्ठ नागरिकों को लाभ हुआ था।

क्या है पीएमवीवीवाई

प्रधानमंत्री वय वंदन योजना का क्रियान्वयन भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से किया जा रहा है। इसका मकसद साठ साल से अधिक उम्र के लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना को लेने वाले सदस्यों को दस साल तक आठ प्रतिशत सुनिश्चित रिटर्न के रूप में वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन मिलती है। वरिष्ठ नागरिक मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक आधार पर पेंशन ले सकते हैं। अगर एलआइसी इस योजना के फंड पर आठ प्रतिशत रिटर्न जेनरेट नहीं कर पाती है तो सरकार उसकी भरपाई करने के लिए सब्सिडी देती है।

चार्टर्ड एकाउंटेंटों को द. अफ्रीका में रोजगार पाना होगा आसान

भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंटों को दक्षिण अफ्रीका में रोजगार के अवसर हासिल करना आसान होगा। केंद्रीय कैबिनेट ने इसके संबंध में एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) और साउथ अफ्रीकन इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स (एसएआइसीए) के बीच पारस्परिक मान्यता के समझौते को मंजूरी मिल गई। इससे भारतीय एकाउंटिंग प्रोफेशनल्स को वहां रोजगार हासिल करना आसान होगा।

व्यावसायिक विवाद जल्द निपटाने को सरकार लाएगी अध्यादेश

सरकार ने व्यावसायिक विवादों के जल्द निपटारे के लिए एक कानून में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दे दी। इससे भारत की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में सुधार होने की उम्मीद है। केंद्रीय विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बताया कि हाईकोर्ट एक्ट के कॉमर्शियल कोर्ट, कॉमर्शियल डिवीजन और कॉमर्शियल अपीलेट डिवीजन में संशोधन के अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई। संसद में लंबित इससे संबंधित विधेयक के अनुसार कॉमर्शियल डिसप्यूट की रकम मौजूदा एक करोड़ रुपये से घटाकर तीन लाख रुपये कर दी गई है। सरकार इस विधेयक के लंबित होने के कारण अध्यादेश लाएगी। इससे विवाद निपटारे का समय मौजूदा 1445 दिनों से कम हो जाएगा। प्रस्तावित अध्यादेश के प्रभावी होने पर कम रकम के विवाद भी निपटाए जा सकेंगे।

हरितक्रांति कृषि उन्नति में शामिल की गईं 11 योजनाएं

कृषि क्षेत्र को और व्यापक बनाने के लिए इसकी सभी प्रमुख 11 योजनाओं को हरितक्रांति कृषि उन्नति योजना में शामिल कर लिया गया है। इस नई योजना के लिए 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया।

इस फैसले से योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और खेती को घाटे से उबारने में मदद मिलेगी। इससे खेती के प्रति लोगों को रुझान बढ़ेगा और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। सभी 11 योजनाओं के एक ही कार्यक्रम बनने से उनका क्रियान्वयन और निगरानी कारगर तरीके से हो सकेगी।

12वीं पंचवर्षीय योजना के आखिर तक यह योजना संचालित की जाएगी। इस पंचवर्षीय योजना का समय 31 मार्च 2020 तक है। वैसे तो इन सभी 11 योजनाओं को पिछले साल ही जोड़ दिया गया था, लेकिन इस प्रस्ताव को मंजूरी बुधवार को मिली है। इसमें केंद्र की हिस्सेदारी 33 हजार 267 करोड़ रुपये होगी। योजनाओं को जोड़ने का उद्देश्य वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को बढ़ाकर दोगुना करना है।

कौन-कौन सी योजनाएं शामिल हैं

इसमें जिन योजनाओं को शामिल किया गया है उनमें मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, सब मिशन और सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन हैं। इनके अलावा सब मिशन ऑन सीड एंड प्लांटिंग मैटीरियल, सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मकैनिज्म, सब मिशन ऑन प्लांट प्रोटेक्शन एंड प्लान क्वारेंटाइन, इंटीग्रेटेड स्कीम ऑन एग्रीकल्चर सेंसस, इकोनॉमिक्स एंड स्टटिस्टिक्स, इंटीग्रेटेड स्कीम ऑन एग्रीकल्चर कोऑपरेशन, इंटीग्रेटेड स्कीम ऑन एग्रीकल्चर मार्केटिंग और नेशनल ई गवर्नेंस प्रमुख हैं।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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