Friday, May 1, 2026
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उम्रदराज और चुनाव हार चुके नेताओं को दोबारा टिकट नहीं

कटनी। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी दीपक बावरिया ने जबलपुर में आयोजित कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक में यह कहकर सनसनी फैला दी है कि 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोग दावेदारी पेश ना करें।

जो लोग पूर्व में विधायक सांसद रह चुके हैं या पूर्व में एक दो चुनाव हार चुके हैं ऐसे लोगों को भी याद चुनाव लड़ने की बजाय संगठन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। श्री बावरिया के इस कथन से टिकट के दावेदार कई नेताओं की नींद हराम हो गई है।

मुड़वारा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस तीन बार से चुनाव हार रही है और हार का अंतर भी लगातार बढ़ता जा रहा है ऐसे में आसन्न विधानसभा चुनाव मे कोई राजनैतिक चमत्मकार ही इस सीट पर कांग्रेस की खोई प्रतिष्ठता लौटा सकता है। बदली परिस्थितियों में इस बार कांग्रेस को मुड़वारा विधानसभा क्षेत्र में नतीजे अपने पक्ष में आ जाने की उम्मीद लग रही है।

कांग्रेस में तय फार्मूले पर अमल हुआ तो इस बार चुनाव के दौरान नए चेहरे सामने आ सकते हैं इसके लिए गुजरात मॉडल पर टिकट वितरण के बारे में सोचा जा रहा है। विधानसभा चुनाव के टिकट को लेकर कांग्रेस में अभी से हलचल दिखाई दे रही है और स्थानीय दावेदार अपने-अपने स्तर पर सक्रिय हो गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस चुनाव प्रचार की राशि उम्मीदवारों से ली जाएगी। इसके लिए कूपन लेना होंगे और दावेदारों को परीक्षा से भी गुजरना पड़ेगा।

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया ने कहा है कि पूर्व में चुनाव लड़ चुके हैं और 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं उन्हें नए चेहरों को आगे आने का मौका देना चाहिए बावरिया के इस कथन से उन दावेदारों में हलचल मच गई है और उनकी नींद हराम हो गई है जो टिकट की आस लगाए बैठे थे। यदि इस फार्मूले पर अमल होगा तो कई दावेदार चुनाव मैदान से बाहर नजर आएंगे।

श्री बावरिया के कथन से दावेदारों ने नए समीकरण बुनने शुरू कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि टिकट वितरण के पहले 4 स्तरों पर परीक्षा होगी तभी टिकट प्राप्त कर पाएंगे।

बावरिया का यह कथन कांग्रेस के राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना है और उम्रदराज दावेदार जहां अपनी टिकट को लेकर संशय में नजर आ रहे हैं वहीं नए चेहरे उत्साहित नजर आने लगे हैं। अब देखना यह है कि टिकट वितरण के दौरान क्या स्थितियां बनती हैं।

 

तीन चुनाव की मायूसी कैसे होगी दूर
कांग्रेस के समक्ष मुसीबतें कम नहीं है। मुड़वारा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पिछले तीन चुनावों से पराजय का स्वाद चख रही है। डॉ. ए.पी. सिंह के बाद कोई चेहरा कांग्रेस का विधायक नहीं बना। भाजपा की टिकट पर अलका जैन, राजू पोद्दार और संदीप जायसवाल ने अपने निकटतम कांग्रेस प्रतिद्वंदियों को पराजित करने में सफलता हासिल की। हर चुनाव में पराजय का अंतर भी बढ़ता गया। ऐसे में कांग्रेस के लिए एक तरह से मुड़वारा क्षेत्र में पुनर्जीवन जैसी स्थिति है। सबसे प्रमुख चुनौती प्रत्याशी चयन को लेकर है। कांग्रेस को ऐसा उम्मीदवार खोजना पड़ेगा जिसकी पार्टी के सभी धड़ों में बराबर की स्वीकार्यता हो और साफ सुथरी छवि के साथ वह पार्टी की नैय्या पार लगा सके। फिलहाल जो नाम टिकट के लिए जा रहे है उनमें से आधे तो चुनाव हार चुके है। ऐसे में कोई युवा और भरोसेमंद चेहरा ही पार्टी को सामने लाना पड़ेगा।
भाजपा के बागियों पर रहेगी नजर
कांग्रेस इस बार दोहरी रणनीति पर काम कर सकती है। पार्टी की नजर खुद के नेताओं के साथ साथ भाजपा से बगावत कर कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं पर भी है। आगामी दिनों में क्या समीकरण बनते हैं इस पर काफी कुछ निर्भर करेगा। वैसे कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी छोड़कर गए नेताओं की घरवापसी को लेकर उत्साह दिखाया है। कटनी में भाजपा से टूटकर कांग्रेस में शामिल होने की शुरूआत भी हो चुकी है। आगामी दिनों में और भी कई नेता पाला बदल लें तो आश्चर्य नहीं।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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