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उत्तर मध्य विधानसभा पर मचा कोहराम

जबलपुर नगर प्रतिनिधि। उत्तर मध्य विधानसभा सीट शहर की चारों विधानसभा सीटों में से सबसे विवादित सीट बन कर सामने आई है। इस विधानसभा में कुल वोटर 207364 हैं जिसमें पुरुष मतदाता 107376 व 99987 महिला वोटर हंै । भाजपा ने उत्तर मध्य से चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरद जैन को अपना प्रत्याशी बनाया है इस चुनाव के दौरान यदि किसी प्रत्याशी को सबसे ज्यादा विरोध का सामना करना पड़ रहा है वह हंै मंत्री जी।
मंत्री पद बन रहा है पनौती
भाजपा संगठन में पिछले 3 पंचवर्षीय से नेताओं के लिए मंत्री पद पनौती साबित हो रहा है, इससे पूर्व हरेंद्र सिंह जीत बब्बू मंत्रि पद में रहने के बाद पश्चिम विधानसभा से चुनाव हार गए थे, आखरी पंचवर्षीय में पाटन विधानसभा के प्रत्याशी अजय विश्नोई जो कि उस वक्त पशुपालन मंत्री थे, चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा था। राजनैतिक गणितज्ञों का कहना है अब यही पनौती फिर से शहर की चिकित्सा मंत्री शरद जैन के इर्द गिर्द घूम रही है ।
जीत का अंतर बढ़ा
हालांकि विरोध जितना भी हो शरद जैन हमेशा लंबे अंतराल से चुनाव जीतने में सफल रहे हैं अर्थात 3 पंचवर्षीय में शरद जैन ने क्रमश: सभी चुनाव में अपनी जीत के अंतर को बढ़ाया है अर्थात कहीं ना कहीं जनता में उनको लेकर अभी भी विश्वास रहता है परंतु यह विश्वास इस चुनाव में डगमगाता दिख रहा है।
विधानसभा चुनाव 2013
भाजपा शरद जैन 74656
कांग्रेस नरेश सर्राफ 41093
विधानसभा चुनाव 2008
भाजपा शरद जैन 55449
कांग्रेस कादिर सोनी 35423
सोशल मीडिया में कमजोर
अगर देखा जाए तो वर्तमान में और इस वक्त जब चुनाव सिर पर हैं शरद जैन की सोशल मीडिया टीम कहीं नहीं दिख रही है जोकि अपने विरोधियों का एक बड़े स्तर पर जवाब दे सके। सोशल मीडिया एक बड़ा हथियार है जो कि जनता के बीच अपने विश्वास को बनाए रखने में सहायक होता है परंतु एक अनुमान के दौरान शहर में सबसे कमजोर टीम सोशल मीडिया की मंत्री जी की है। विरोधियों द्वारा विभिन्न प्रकार के स्लोगन सोशल मीडिया पर शरद जैन को लेकर फैलाई जा रहे हैं।
कांगे्रस रख रही फूंक-फूक कर कदम
कांग्रेस में दावेदारों की संख्या एक दर्जन से अधिक बताई जा रही थी जो ये दावा कर रहे थे कि यह क्षेत्र उनका है तथा वह ही टिकिट लेकर बाजी जीतने में सक्षम हैं।पर वही कांग्रेस ने उत्तर मध्य से विनय सक्सेना के नाम की घोषणा कर दी है। कांग्रेस चुनाव समिति ने गुरुवार शाम 17 नामों की लिस्ट जारी कर दी, जिसमें तमाम संभावनाओं को दरकिनार करते हुए विनय सक्सेना के नाम पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी। पार्टी के इस अप्रत्याशित फैसले ने सभी को हैरत में डाल दिया। कांग्रेस ने जबलपुर की 7 विधानसभा के प्रत्याशियों के नाम की घोषणा पूर्व में ही कर दी थी। लेकिन उत्तर मध्य सीट में पार्टी फूंक -फूंक कर कदम रख रही थी और इस विधानसभा क्षेत्र को लेकर शहर में रोचकता का आलम था। लेकिन पार्टी के इस निर्णय से विवाद भी जन्म लेंगे, विनय सक्सेना पर बाहरी नेता होने का आरोप लग रहा है । क्षेत्रीय सशक्त दावेदारों के बावजूद इस घोषणा से नेताओं की अनदेखी करना कहीं पार्टी को भारी पड़ सकता था , परंतु मिलनसार व्यवहार और सजगता के चलते विनय सक्सेना द्वारा पार्टी के सभी नेताओं को लगभग अपने साथ कर लिया ।
कुछ नेता अब भी हैं विरोध में
कुछ नेताओं का यह कहना है कि विनय सक्सेना पूर्व क्षेत्र के रहवासी हैं और उत्तर मध्य में उनकी दावेदारी कहीं से भी सशक्त नहीं दिखती। परंतु हाईकमान के आदेश के बाद कांग्रेस संगठन बहुत दिनों बाद एकजुट होता दिखाई दे रहा है
क्षेत्रीय सशक्त दावेदारों के बावजूद इस घोषणा से नेताओं की अनदेखी करना कहीं पार्टी को भारी न पड़े और वर्तमान परिस्थितियों के चलते तोहफे में मिल रही जीत कहीं हाथ से फिसल ना जाए।
जातियों पर आधारित गणित
1 मुस्लिम 40 000
2. ब्राम्हण 42000
3. जैन 18000
अन्य
अग्रवाल, गहोई, कायस्थ अन्य सवर्ण 30000
यादव, कोष्टा, साहू, सोनी, रजक 40000
शेष-अन्य जाति
निर्दलीय प्रत्याशी है मैदान में
भाजपा को अगर किसी निर्दलीय प्रत्याशी से सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है तो वह हैं धीरज पटेरिया। युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तथा तीन बार से उत्तर मध्य विधानसभा चुनाव में टिकट मांग रहे धीरज पटेरिया इस बार पूर्ण रूप से बगावत में उतर आए हैं और शरद जैन के लिए सरदर्द बने हुए हैं। युवाओं का बहुत बड़ा समूह उनके साथ जुड़ गया है तथा एक विशेष ब्राह्मण जाति का वर्ग धीरज पटेरिया को समर्थन कर रहा है। जबलपुर के इतिहास में पहली बार कोई निर्दलीय प्रत्याशी इतनी व्यापकता में प्रसिद्धि पाने में सफल दिख रहा है।
क्या कह रहा है राजनीतिक गणित
राजनीतिज्ञों का कहना है कि धीरज पटेरिया चुनाव जीते या ना जीते परंतु शरद जैन के चुनावी गढ़ में सेंध लगाने में बहुत हद तक सफल हो सकते हैं क्योंकि उत्तर मध्य में युवा एवं ब्राम्हण वर्ग एक बड़े रूप में सक्रिय हैं , वहीं कुछ लोगों का कहना है युवाओं की संख्या तो बहुत है परंतु यह युवावर्ग शहर का नहीं है और अभी तक आम जनता इतने बड़े रूप में पटेरिया जी से नहीं जुड़ी है । परंतु धीरज पटेरिया ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतर कर पूरे उत्तर मध्य विधानसभा का ध्यान मध्यप्रदेश में खींच लिया है। वहीं शरद जैन के लिए राजनीतिज्ञों का कहना है कि ऐसा विरोध शरद जैन के साथ हर चुनाव के पूर्व दिखता है परंतु अंत में जी शरद जैन की जीत होतीहै । अत्यंत सरल स्वभाव ही उन्हें चुनाव में जीत दिला देता है । परंतु इस बार संक्रामक बीमारियों ने उन्हें विवादों में ला दिया है । जनता में विरोध तो है अब देखना है कैसे इस विरोध को शरद जैन खत्म कर पाते हैं।
दो की लड़ाई में फायदा
वहीं राजनैतिक पंडितों का कहना हैं कि इन दोनों की लड़ाई का फायदा अगर कांग्रेस में गुटबाजी ना हो तो विनय सक्सेना को सीधे तौर पर मिल सकता है परंतु गणितज्ञ कहते हैं कि उत्तर-मध्य विधानसभा जो पहले मध्य विधानसभा के नाम से जानी-जाती थी, उसमें कांग्रेस ने 1985 के बाद जीत का स्वाद नहीं चखा है। ॅ ये अलग बात है कि पूर्व मंत्री पं. ओंकार तिवारी के निधन पश्चात हुये उपचुनाव में कांग्रेस के नरेश सराफ ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद लगातार भाजपा का कब्जा बना हुआ है। इस बार भी जिस प्रकार की परिस्थितियां कांग्रेस के समक्ष बनी , कांग्रेस में दावेदार बढ़े थे इसका सबसे बड़ा कारण बकौल कांग्रेसजन- कांग्रेस को भाजपा नहीं कांग्रेस ही हराती है। क्योंकि टिकिट एक होती है और दावेदारों की संख्या अधिक जिस व्यक्ति / नेता को टिकिट मिलती है, उसे दूसरे नेता हराने में एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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