इंदौर। इंदौर दुग्ध संघ के पास खपत से अधिक दूध की आवक होने से इसे संभालना मुश्किल हो रहा है। हर दिन करीब 50 हजार लीटर दूध बच रहा है जिसके अन्य उत्पाद बनाने पड़ रहे हैं। प्रबंधन में आ रही मुश्किल से संघ ने तय किया है कि किसानों से दूध के खरीदी भाव कम कर दिए जाएं। उज्जैन दुग्ध संघ ने तो खरीदी रेट कम कर भी दिए हैं।
फिलहाल किसानों से दूध के खरीदी रेट 5.40 रुपए प्रति फैट हैं। उज्जैन में इसे 5.20 रुपए प्रति फैट कर दिया गया है। इंदौर दुग्ध संघ के पास हर दिन लगभग 2.90 लाख लीटर दूध आ रहा है। इसमें से 2.30 लाख लीटर दूध ही शहर में खप रहा है। कुछ दूध के अन्य उत्पाद बनाने के बावजूद संघ को हर दिन 50 हजार लीटर दूध का प्रबंधन करने में मुश्किल आ रही है। संघ बचे हुए सारे दूध का बटर और मिल्क पाउडर भी नहीं बना सकता, क्योंकि उसके पास इनका पहले से ही भारी स्टॉक है। बताया जाता है कि संघ के पास मिल्क पाउडर का करीब 2300 टन का स्टॉक रखा है। लगभग इतना ही स्टॉक बटर का भी है।
दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एएन द्विवेदी का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बटर और पाउडर के भाव कम होने से इसे बेचने में भी दिक्कत आ रही है। बेचने के टेंडर निकाले गए थे लेकिन खरीदारों ने पर्याप्त रेट नहीं दिए। इस कारण अभी बिक्री नहीं हुई है। नेशनल को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के माध्यम से भी बटर और पाउडर बेचने के प्रयास किए जा रहे हैं। दूध बच रहा है इसलिए संघ के पास दूध के खरीदी रेट कम करने के अलावा कोई चारा नहीं है। इस पर विचार चल रहा है।