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जनसुनवाई में पहुंचा जर्जर भवन ढहाने का मामला, शिकायतकर्ता ने निगम इंजीनियर पर लगाए गंभीर आरोप,

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जनसुनवाई में पहुंचा जर्जर भवन ढहाने का मामला, शिकायतकर्ता ने निगम इंजीनियर पर लगाए गंभीर आरोप

कटनी -रघुनाथ गंज स्थित भवन क्रमांक 134 को खतरनाक घोषित कर गिराने की मांग कटनी। शहर के रघुनाथ गंज, सिल्वर टॉकीज रोड पर स्थित एक अत्यधिक जर्जर और खतरनाक भवन को ढहाने की मांग एक बार फिर गरमा गई है। कलेक्टर कार्यालय में आवेदक राजकुमार मुकेश कुमार जैन ने एक लिखित आवेदन सौंपकर इस जर्जर भवन को तत्काल जमींदोज करने और इस पर किए जा रहे अवैध निर्माण व मरम्मत कार्य पर रोक लगाने की गुहार लगाई है। राजकुमार जैन के अनुसार, नगर निगम अभिलेखों में दर्ज भवन क्रमांक 134 (पुराने भवन स्वामी: बूंदा बहू ध.प मोहन लाल, कालूराम, मूलचंद और सुभाष चंद्र) की स्थिति बेहद चिंताजनक है। इस भवन में सम्मुखदास खटवानी के वारसान सुरेश खटवानी और जितेंद्र कुमार खटवानी बतौर किराएदार रह रहे हैं। आवेदक का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी नगर निगम को इस भवन के खतरनाक होने की सूचना देकर इसे ध्वस्त करने का आवेदन दिया था। शिकायतकर्ता ने नगर निगम के संबंधित इंजीनियर की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदन में कहा गया है कि निगम द्वारा उनके आवेदन पर दिखावे की कार्रवाई तो की गई, लेकिन जो हिस्सा सबसे ज्यादा जर्जर है, उसे जानबूझकर नहीं तोड़ा गया। भवन की पूरी बीम गल चुकी है और सड़ चुकी है। आवेदक ने आशंका जताई है कि इंजीनियर ने किसी प्रलोभन या राजनीतिक/व्यक्तिगत दबाव के चलते तोड़ने की कार्रवाई को अधूरा छोड़ दिया।

आवेदक ने कलेक्टर को बताया कि इस अत्यंत जर्जर दो मंजिला भवन का प्रथम और द्वितीय तल का हिस्सा पूरी तरह कमजोर हो चुका है, जो दोबारा रिपेयरिंग के योग्य भी नहीं है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस खतरनाक भवन के ठीक नीचे वर्तमान में टेलर (सिलाई) का काम किया जा रहा है, जहाँ प्रतिदिन आम लोगों और ग्राहकों का आना-जाना लगा रहता है। यदि यह कमजोर छत या भवन अचानक गिरता है, तो भारी जनहानि हो सकती है।

आवेदक ने स्पष्ट किया है कि वे पूर्व में भी इसकी सूचना कई बार नगर निगम प्रशासन को दे चुके हैं। बिना लिखित अनुमति के किराएदार सुरेश कुमार खटवानी द्वारा भवन में किए जा रहे किसी भी बदलाव या हादसे के लिए वे जिम्मेदार नहीं होंगे। उन्होंने कलेक्टर महोदय से मांग की है कि:​भवन की पुनः निष्पक्ष जांच कराई जाए।

​इसे तत्काल ‘खतरनाक’ घोषित कर ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाए। ​जर्जर भवन में चल रहे किसी भी प्रकार के मरम्मत या निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाई जाए ताकि भविष्य में किसी अप्रिय घटना को टाला जा सके।

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