जेल पहुंचते ही पूर्व जज गिरिबाला ने दिखाया ‘VIP रुतबा’, सीधे अंदर ले जाना चाहती थीं कार; जेल प्रशासन ने कहा- ‘कानून सबके लिए बराबर’
जेल पहुंचते ही पूर्व जज गिरिबाला ने दिखाया 'VIP रुतबा', सीधे अंदर ले जाना चाहती थीं कार; जेल प्रशासन ने कहा- 'कानून सबके लिए बराबर'
जेल पहुंचते ही पूर्व जज गिरिबाला ने दिखाया 'VIP रुतबा', सीधे अंदर ले जाना चाहती थीं कार; जेल प्रशासन ने कहा- 'कानून सबके लिए बराबर'
नई दिल्ली: देश के चर्चित त्विषा शर्मा डेथ केस में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद जेल भेजी गईं पूर्व जज गिरिबाला सिंह का सामना जैसे ही जेल की विधिक और जमीनी हकीकत से हुआ, तो उनके रसूख की हवा निकल गई। जेल सूत्रों से मिली सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, पूर्व जज ने जेल की दहलीज पर कदम रखते ही अपने पुराने पद और वीआईपी स्टेटस का इस्तेमाल कर नियमों को धता बताने की कोशिश की, लेकिन जेल प्रबंधन के सख्त और विधिक रूप से अडिग रवैये के आगे उनकी एक न चली।
जेल पहुंचते ही पूर्व जज गिरिबाला ने दिखाया ‘VIP रुतबा’, सीधे अंदर ले जाना चाहती थीं कार; जेल प्रशासन ने कहा- ‘कानून सबके लिए बराबर’
कार सीधे अंदर ले जाने की जिद, सुरक्षाकर्मियों को दी CBI अधिकारी की धौंस
प्रत्यक्षदर्शियों और जेल सुरक्षा विंग से मिली विधिक जानकारी के अनुसार, जेल के मुख्य द्वार पर उस वक्त भारी गहमागहमी देखने को मिली जब पूर्व जज की गाड़ी वहां पहुंची:
सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश: पूर्व जज गिरिबाला सिंह जेल के मुख्य सुरक्षा घेरे (Main Security Cord) को पार कर अपनी लग्जरी कार और सह-आरोपी बेटे समर्थ के साथ सीधे जेल परिसर के भीतर तक दाखिल होना चाहती थीं।
अधिकारियों पर दबाव की कोशिश: जब मुख्य गेट पर तैनात मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों ने विधिक नियमों के तहत उनकी गाड़ी को बाहर ही रोक दिया, तो पूर्व जज भड़क गईं। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर मानसिक दबाव बनाने के लिए अपने पुराने रुतबे की दुहाई दी और यहां तक कह दिया कि वे इस संबंध में एक सीनियर सीबीआई (CBI) अधिकारी से उनकी बात करा सकती हैं।
नियमों का हवाला देकर मोड़ा रास्ता, भारी मन से पैदल ही जाना पड़ा अंदर
जेल प्रबंधन ने स्पष्ट और विधिक स्टैंड लेते हुए आरोपी पूर्व जज को साफ बता दिया कि कानून के आगे कोई छोटा-बड़ा या वीआईपी नहीं होता, यहाँ हर कैदी के लिए मैनुअल एक समान है:
कार को गेट पर ही रोका: जेल गेट पर तैनात अधिकारियों ने उच्चादेशों और जेल सुरक्षा मैनुअल (Jail Manual Rules) का सख्त हवाला देते हुए उनके वीआईपी अनुरोध को सिरे से खारिज कर दिया और कार को अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी।
झुकना पड़ा रुतबा: काफी देर तक कार से नीचे न उतरने की जिद करने के बाद, जब पूर्व जज को समझ आ गया कि जेल प्रशासन झुकने वाला नहीं है, तो उन्हें भारी मन से कार से नीचे उतरना पड़ा।
पैदल तय किया रास्ता: कोई और विधिक रास्ता न बचता देख पूर्व जज गिरिबाला और उनका बेटा समर्थ पैदल ही मुख्य द्वार से जेल परिसर के अंदर जाने को मजबूर हुए। अंदर दाखिल होते ही पूर्व जज सीधे जेल अधीक्षक (Jail Superintendent) के कमरे में पहुंचीं, जहां उनकी जेल एंट्री की विधिक कागजी प्रक्रिया पूरी की गई।