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इसी बहाने : राम तेरी गंगा…

न दिनों चर्चा है या तो बंधन, गठबंधन, रैली अथवा
बयानों की तो गूगल पर ट्रेंड के मामले में प्रयागराज कुंा
भी जमकर ट्रेंड कर रहा है। यूं तो कुंा इस देश ही नहीं
समूचे विश्व की वो धरोहर है जिसे दुनिया भर में
आध्यात्म और ईश्वर की अनुकंपा का उदाहरण
माना जाता है। भारत को कुंभ जैसे मेले पर गर्व
है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा मेला कहा जाता
है। आज कुंभ की तस्वीरें पूरी दुनिया की मीडिया
की सुर्खियां बन रहीं हैं। कभी किन्नर आखाड़ा
चर्चा में है तो कभी केबिनेट की डुबकी को
लेकर मीडिया ट्रेंडिंग चल रही है। इस बीच कुंभ
से दूर बैठे कई लोग कोई फेसबुक तो कोई
ट्विटर पर ही कमेंट की डुबकी लगाने में जुटा
है। कहा जाता है की राम की गंगा यमुना
सरस्वती में डुबकी लगाने से सभी पाप धुल जाते हैं। गंगा पाप धोते धोते
भले ही मैली हो गई हो, लेकिन पाप है कि धुलने की नाम नहीं ले रहे।
गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के इस महाकुंभ में भी फिलहाल पाप
धोने की होड़ लगी है। श्रद्धालु भले ही इस डुबकी से अपने 7 जन्म को
सुफल करने की इच्छा मन में रख कर उत्साहित हैं तो वहीं हमारे माननीय भी पीछे
नहीं हैं। भले ही इसमें पाप या पुण्य का कोई मेल न हो पर डुबकी लगाने से मन ही
मन पाप धुलने का विचार तो आ ही जाता होगा। संगम में स्नान के साथ ही यहां
फिलहाल राजनीतिक डुबकियां भी खूब लग रही हैं। नदियों के संगम और दुनिया भर
से आये श्रद्धालुओं के संगम के साथ ही राजनीतिक संगम भी खूब हिट हो रहा है।
आये दिन यहां राजनीति के गठबंधनों का संगम चर्चाओ में है। मां गंगा तो अपने पुत्रों
के पाप धोने के लिए सदियों से इस धरा पर बहती हुई अपना कर्तव्य निभा रही हैं,
बस गंगा पुत्र ही हैं जो उन्हें भूल रहे हैं। कुंभ में कड़कड़ाती ठंड के बीच साा और
विपक्ष इस धर्म राजधानी में कभी प्रस्ताव पास कर रहे हैं तो कभी प्रस्ताव पर विरोध
दर्ज करा रहे हैं। देश में ऐन चुनावों से पहले कुंभ में देश के 13 धार्मिक अखाड़े तो
सक्रिय हैं ही यहां राजनीति के अखाड़े भी रोज तैयार हो रहे हैं। चुनावी बयार के बीच
संगम में राजनीतिक डुबकियों ने भरी ठंड देश में गर्मी ला दी है। अभी समय बाकी है।
कुंभ में इन राजनीतिक डुबकियों से कितने पाप धुलेंगे यह तो आने वाला वक्त ही
बताएगा पर एक बात तो तय है कि यह इस बार का यह कुंभ बेहद चर्चित होने वाला
है। देश दुनिया से सिर्फ साधु संत ही नहीं यहां पर देश के राजनीतिक संतों की भी
प्रतिभागिता ाी कम नहीं है। कुंभ के तुरंत बाद ही लोकतंत्र के महाकुंभ का आगाज
हो जाएगा। फिर देखना होगा कि प्रयागराज कुंभ में किसकी डुबकी का उसे या फल
मिलता है।

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