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‘आयुष्मान’ को लेकर भी केंद्र से टकराव, ब्रांडेड कम्पनियों के दाम पर मिल रही जैनरिक दवाइयां

नेशनल डेस्‍क।  मरीजों को सस्ता इलाज उपलब्ध करवाने के नजरिए से सरकार की तरफ से सिविल अस्पतालों में डाक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं कि मरीजों को जैनरिक दवाइयां ही लिख कर दी जाएं मगर हकीकत यह है कि मरीजों को कैमिस्ट शॉप्स पर जैनरिक दवाइयां ब्रांडेड के नाम पर महंगे दाम पर बेची जा रही हैं। दूसरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा देने की योजना ‘आयुष्मान भारत’ को हजारों निजी अस्पतालों ने झटका दे दिया है। इन अस्पतालों ने इस योजना के तहत मरीजों को सस्ता इलाज देने से साफ मना कर दिया है। इस संबंध में कुछ दिन पहले इन अस्पतालों ने नीति आयोग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को एक पत्र लिखकर इसका खुलासा भी किया था। इसके बाद ‘आयुष्मान भारत’ के तहत मरीजों को अस्पताल में मिलने वाले पैकेज की कीमतों में बीते दिनों बदलाव भी किया गया।
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क्या है आयुष्मान भारत योजना
केंद्र सरकार की तरफ से ‘आयुष्मान भारत योजना-2018’ गरीबों के लिए पूरे भारत में लाई जा रही है। यह स्कीम उन गरीब परिवारों के सदस्यों के लिए लाभदायक साबित होगी जो बड़े अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं करवा सकते। योजना के तहत गरीब परिवारों के सदस्यों के लिए 5 लाख रुपए तक का सेहत बीमा किया जाएगा। पंजीकृत मरीज किसी भी प्राइवेट अस्पताल से दवा ले सकता है। इस स्कीम के अंतर्गत एक कार्ड जारी किया जाएगा जोकि कैशलैश सिस्टम को अमली रूप देगा।
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न्यायसंगत नहीं सरकार द्वारा तय रेट
आई.एम.ए. पंजाब के पूर्व डॉ. मनोज सोबती का कहना है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार ने जो रेट तय किए हैं वे न्यायसंगत नहीं हैं। सरकार सस्ते इलाज की बात तो करती है मगर निजी अस्पतालों को सुविधाएं देने के मामले पर हाथ पीछे खींचती है। यही बात कुछ और अस्पतालों के संचालकों ने भी कही है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि जब किसी मरीज का नी-रिप्लेसमैंट किया जाता है या सर्वाइकल जैसी बड़ी सर्जरी की जाती है तो मरीज को कई दिनों तक अस्पताल में रखना पड़ता है, जिस कारण अस्पताल का खर्च बढ़ जाता है। दूसरी तरफ आयुष्मान भारत योजना की तरह निजी अदारों में कार्यरत कर्मचारियों को ई.एस.आई. अस्पताल में इलाज की सुविधा दी जाती है। ई.एस.आई. से रैफर होकर कई मरीज इलाज के लिए बड़ेे अस्पतालों में भर्ती हो जाते हैं। अस्पतालों का कहना है कि सरकार की तरफ उनका पैसा फंस जाता है और कई-कई साल पैसा नहीं मिलता है। निजी अस्पतालों के संचालकों का कहना है कि सरकार गरीबों के लिए योजना बनाते समय निजी अस्पतालों की भी सहमति ले।
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जैनरिक दवाइयों में क्या है खेल
आम तौर पर मरीज को पता नहीं चला रहा है कि ब्रांडेड दवाइयां कौन सी हैं और जैनरिक दवाइयां कौन सी हैं। कैमिस्ट के मुताबिक जिस भी दवाई पर किसी कंपनी के ब्रांड का नाम आ गया वह ब्रांडेड है। इसलिए दवाई का जो एम.आर.पी. लिखा है वही सही रेट है, जबकि होलसेल में वही दवाई कैमिस्ट को 70 से 90 प्रतिशत कम रेट पर मिलती है। साथ में दवा कंपनी की तरफ से स्कीम अलग से दी जाती है। कुछ डाक्टर दवा कंपनियों के साथ मिलकर अपने ब्रांड के नाम से भी दवाई तैयार करवाते हैं, जिसका फायदा दवा कंपनी और कैमिस्ट को तो होता ही है साथ में डाक्टर को भी मोटी कमाई होती है।
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स्ट्रिप पर लिखा जाए जैनरिक तो सस्ती मिलेगी दवा
होलसेल कैमिस्ट आर्गेनाइजेशन के प्रधान बने रिशु वर्मा का कहना है कि किसी भी दवाई की कीमत केंद्र सरकार की तरफ से तय की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा जैनरिक दवाइयों की कीमत तय करनी चाहिए। दवा की स्ट्रिप पर अलग से लिखा जाना चाहिए कि यह दवाई जैनरिक है। साथ में इसका एम.आर.पी. भी जैनरिक के हिसाब से लिखा जाना चाहिए।

राज्य में पहले ही ठंडे बस्ते में है यह योजना
आयुष्मान भारत योजना को लेकर केंद्र व पंजाब सरकार के बीच पहले ही टकराव की स्थिति पैदा हो चुकी है। पंजाब के सेहत मंत्री ब्रह्म महेंद्रा इस योजना के एम.ओ.यू. (मैमोरैंडम ऑफ अंडर स्टैंङ्क्षडग) पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर चुके हैं। सेहत मंत्री साफ कर चुके हैं कि केंद्र सरकार की इस योजना बारे अभी काफी कुछ साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार अपने हिस्से का 60 प्रतिशत फंड किस तरह जारी करेगी, यह स्पष्ट करे।

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