Site icon Yashbharat.com

अब हर बिजली उपभोक्ता का होगा QR Code, मीटर पर होगा खास स्टीकर

electricity consumer qr code 2019618 84124 18 06 2019 m

इंदौर। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के हर बिजली उपभोक्ता का एक ‘क्यूआर कोड’ होगा। इंदौर स्थित बिजली कंपनी हर बिजली मीटर पर कोड के स्टीकर लगाने जा रही है। मीटर पर कोड अंकित होने के बाद रीडिंग लेने के लिए स्मार्ट फोन से बिजली कर्मचारी को सिर्फ कोड स्कैन करना होगा। बिलों में गड़बड़ी रोकने से लेकर शिकायत तक के सिस्टम तक को स्मार्ट बनाने के लिए बिजली कंपनी नया प्रयोग कर रही है। मंगलवार से क्यूआर कोड मीटर पर लगाने की शुरुआत होगी।

पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी प्रदेश की पहली बिजली कंपनी बनने जा रही है जो क्यूआर कोड का नया प्रयोग कर रही है। अभी क्यूआर कोड का चलन डिजिटल पेमेंट के साथ उपभोक्ता सामग्री की पहचान और बिलिंग जैसे कामों में हो रहा है। बिजली मीटरों पर क्यूआर कोड लगाने की शुरुआत इंदौर के पास बसे हातोद कस्बे से होगी। नौ महीने में बिजली कंपनी कुल 43 लाख घरों के मीटरों पर कोड अंकित करेगी। इसके बाद औद्योगिक मीटरों पर भी यह कोड अंकित किया जाएगा। कोड के जरिए बिजली कंपनी ने शुरुआती दो लक्ष्य साधे हैं। पहला सही बिलिंग व रीडिंग और दूसरा मीटराइजेशन की सही जानकारी हासिल करना।

ग्रामीण क्षेत्रों की भी मिलेगी जानकारी

करीब डेढ़ साल पहले कंपनी ने फोटो मीटर रीडिंग शुरू की थी। बिल की गड़बड़ी दूर करने के लिए मीटर रीडर के लिए अनिवार्य किया गया था कि वह उपभोक्ता के मीटर की रीडिंग का फोटो ले जिसमें रीडिंग भी नजर आए। रीडरों ने सिस्टम का विरोध किया लेकिन कंपनी की सख्ती और मानदेय बढ़ाने के बाद इस पर अमल शुरू किया। बिजली कंपनी को शिकायत मिलती थी कि उपभोक्ताओं को बिना रीडिंग लिए मन से रीडिंग दर्ज कर गलत या फिर औसत रीडिंग वाले बिल भेजे जा रहे हैं।

फोटो मीटर रीडिंग से इस पर अंकुश लगता तो दिखा लेकिन बाद में कई रीडरों ने इससे पार पाने के लिए धुंधले फोटो लेकर कंपनी के सॉफ्टवेयर पर अपलोड करना शुरू कर दिया। इससे फोटो और रीडर द्वारा उपभोक्ता की दर्ज रीडिंग का मिलान नहीं हो पाता था। कई जगह उपभोक्ताओं की शिकायत भी मिलने लगी थी कि गलत रीडिंग या बिना फोटो रीडिंग वाला बिल उन्हें जा रहा है। क्यूआर कोड से बिजली कंपनी को इन परेशानियों से निजात मिलती भी दिख रही है। दूसरा, ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे उपभोक्ताओं की जानकारी भी कंपनी को मिल जाएगी जहां मीटर नहीं लगे हैं या खराब हैं।

सही मीटर का होगा फोटो

अभी के सिस्टम में रीडर काम से बचने के लिए किसी भी फोटो का धुंधला फोटो डालकर सिस्टम को धोखा दे सकता है। क्यूआर कोड अंकित होने से यह रास्ता नहीं बचेगा साथ ही रीडिंग का काम भी जल्दी हो सकेगा। असल में रीडिंग लेने के लिए मीटर रीडर को उपभोक्ता के मीटर पर लगा क्यूआर कोड अपने स्मार्ट फोन के कैमरे से स्कैन करना होगा। ऐसा करते ही उपभोक्ता की पूरी जानकारी और आईवीआरएस नंबर के साथ मीटर का फोटो बिजली कंपनी के सॉफ्टवेयर में दर्ज हो जाएगा। रीडर सिर्फ तीन-चार अंकों की रीडिंग दर्ज करेगा। हर उपभोक्ता का क्यूआर कोड अलग है, लिहाजा रीडर किसी भी उपभोक्ता के बिलिंग सॉफ्टेवयर में किसी अन्य उपभोक्ता के मीटर का फोटो नहीं डाल सकेगा। इससे रीडिंग भी सही दर्ज होगी।

शहर में तीन महीने इंतजार

बिजली कंपनी ने अपना नया बिलिंग सॉफ्टवेयर भी तैयार किया है। उसके जरिए क्यूआर कोड बिलिंग की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्र से की जा रही है। दरअसल, शहरों की बिलिंग का ठेका बिजली कंपनी वर्षों पहले टीसीएस कंपनी को दे चुकी थी। कंपनी से बिलिंग के काम का करार तीन महीने में खत्म होगा। लिहाजा तीन महीने बाद इंदौर-उज्जैन समेत अन्य शहरों में क्यूआर कोड लगाने का काम शुरू होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए टीसीएस से बिलिंग का करार नहीं है, लिहाजा कंपनी यहां मंगलवार से काम शुरू करने जा रही है।

हर स्टीकर पर एक रुपए खर्च

क्यूआर कोड और उसके स्टीकर कंपनी बाहरी एजेंसी की बजाय अपने आईटी विभाग से तैयार करवा रही है। हर स्टीकर पर सिर्फ एक रुपए का खर्च आएगा। बाहरी एजेंसी से यह काम करवाते तो खर्च तीन-चार गुना होता। इससे एक्यूरेट रीडिंग संभव हो सकेगी। विकास नरवाल, एमडी, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

Exit mobile version