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सिंधी समाज की महिलाओं ने मनाया ट्रीजड़ी पर्व: पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखा, अब चन्दमा निकलने का कर रहीं इंतजार

कटनी। आज सिंधी समाज का ट्रीजड़ी एक सिंधी त्योहार है जिसमें कुंवारी लड़कियां और शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। दि‍नेश जी पंडि‍त  के नि‍वास गुरूनानक वार्ड पर पूजा अर्चना का विशेष कार्यक्रम हुआ।

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आज व्रत से एक दिन पहले महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाई हैं। सभी महिलाएं  आज ट्रीजड़ी के दिन  सूर्योदय से पहले उठ कर और मुसाग जड़ी बूटी से दांत किया। और व्रत की शरुआत की।

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इसके बाद अपना निर्जला उपवास शुरू करती हैं।आज के दिन ट्रीजड़ी माता की पूजा की और व्रत से कुछ दिन पहले उगाए  पौधे  ट्रीजड़ी को जल चढ़ाया और ट्रीजड़ी को हाथ से झूला झुलाया ।और दिन भर पूजा पाठ का आयोजन शुरू किया।
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अब बस शाम में सूरज डूबने के बाद ट्रीजड़ी माता की कथा सुनी जाती है। फिर चांद के निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्रमा का अर्घ्य देने के लिए एक थाली तैयार की जाती है जिसमें साबूत चावल, कच्चा दूध, चीनी और खीरा रखा जाता है। साथ में अगरबत्ती और जल से भरा कलश रखा जाता है।
फिर चांद को जल चढ़ाकर थाली में लाया गया भोग अर्पित किया जाता है और साथ में अगरबत्ती दिखाई जाती है। इसके बाद महिलाएं सिंपल खाना खाकर अपना उपवास तोड़ती हैं। और चन्द्रमा को आर्ग देकर व्रत खोला जाता है।

दि‍नेश जी पंडि‍त  के अनुसार सिंधी समाज ने अपनी समृद्ध पर्व परंपरा का निर्माण करते हुए आज गुरुवार को तीजड़ी पर्व मनाया।  यह पर्व मनाने की परंपरा समाज में बरसों से चली आ रही है।

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