इस प्यार को क्या नाम दूं?: बांधवगढ़ में बाघिन ने किया चरवाहे पर हमला, तो जान पर खेलकर 2 भैंसों ने बचाई मालिक की ज़िंदगी
उमरिया कहते हैं कि इंसान भले ही वक्त बदलने पर धोखा दे जाए, लेकिन बेज़ुबान जानवरों की वफादारी में कभी मिलावट नहीं होती। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से वफादारी और साहस की एक ऐसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। जंगल में जब एक खूंखार बाघिन ने चरवाहे पर जानलेवा हमला कर दिया और मौत बिल्कुल सामने खड़ी थी, तब उसके पालतू जानवरों ने जो किया, उसने इंसानी रिश्तों और प्यार की परिभाषा ही बदल दी। मालिक को बाघिन का निवाला बनते देख उसकी दो बेज़ुबान भैंसें अपनी जान की परवाह किए बिना सीधे बाघिन से भिड़ गईं और उसे खदेड़कर अपने मालिक को मौत के मुंह से वापस खींच लाईं। इस अनोखे और अद्भुत मंज़र को देखकर हर किसी की ज़ुबान पर बस यही एक बात आ रही है- ‘इस प्यार को क्या नाम दूं?’
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) में वफादारी और साहस की एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। जंगल में एक बाघिन ने चरवाहे पर जानलेवा हमला कर दिया, लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर उसकी दो भैंसों ने बाघिन पर पलटवार किया और उसे वापस जंगल में भागने पर मजबूर कर दिया।
अपने शावक के साथ घूम रही थी बाघिन
घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया:
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मवेशी की तलाश: बुधवार को पनपाठा कोर एरिया (Panpatha Core Area) के पास 36 वर्षीय रामनरेश सिंह अपने दो गुमशुदा मवेशियों (भैंसों) की तलाश में जंगल की ओर गए थे।
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बाघिन से सामना: झाड़ियों के बीच रामनरेश का सामना अचानक एक बाघिन से हो गया, जो अपने छोटे बच्चे (शावक) के साथ वहाँ घूम रही थी।
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अचानक हमला: अपने शावक की सुरक्षा को लेकर आक्रामक हुई बाघिन ने रामनरेश पर सीधा हमला बोल दिया, जिससे उनका एक हाथ बुरी तरह घायल हो गया।
भैंसों का पराक्रम: मालिक को दी नई जिंदगी
बाघिन जब रामनरेश को खींचकर ले जाने की कोशिश कर रही थी, तभी एक ऐसा अप्रत्याशित मोड़ आया जिसने रामनरेश की जान बचा ली:
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भैंसों का पलटवार: चरवाहे की चीख-पुकार सुनकर पास में ही मौजूद उसकी दोनों भैंसें तुरंत अपने मालिक की रक्षा के लिए दौड़ीं।
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बाघिन को खदेड़ा: भैंसों ने बिना डरे उग्र रूप अपनाते हुए बाघिन पर धावा बोल दिया। भैंसों के अचानक और जोरदार विरोध से घबराकर बाघिन अपने बच्चे को लेकर जंगल के घने हिस्सों में भाग खड़ी हुई।
अस्पताल में इलाज, हालत में सुधार
घटना के बाद डरे-सहमे रामनरेश किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुँचे। रात भर चले इलाज और प्राथमिक उपचार के बाद जब उनकी स्थिति में सुधार हुआ, तब उन्होंने इस चमत्कारिक घटना का ब्योरा साझा किया। डॉक्टरों के अनुसार अब वे खतरे से बाहर हैं। इस प्यार को क्या नाम दूं?: बांधवगढ़ में बाघिन ने किया चरवाहे पर हमला, तो जान पर खेलकर 2 भैंसों ने बचाई मालिक की ज़िंदगी
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