Vikas dubey: अपनी कमाई को दूसरों के धंधे में लगाता था विकास, ये लोग कुछ ही वर्षों में बन गए करोड़पति
विकास दुबे ने अपने 35 साल के आपराधिक जीवन में अरबों रुपये की संपत्ति बनाई।
इनमें से 80 फीसदी संपत्तियां विकास दुबे या इसके परिवार के सदस्यों के नाम नहीं हैं।
जमीन पर अवैध कब्जा, वसूली, हत्या की सुपारी, शराब, जुए और हथियार के धंधे से हुई कमाई को वह दूसरे के सफेद धंधे में निवेश करता था।
शहर और आसपास के जिलों में व प्रदेश के बाहर उसके दर्जन भर से अधिक ऐसे लोग हैं, जो उसका आर्थिक साम्राज्य चला रहे हैं। जय बाजपेई इनमें से एक है। यही वजह है कि जय जैसे तमाम साधारण नौकरी पेशा या दुकानदारी करने वाले लोग कुछ ही वर्षों में करोड़पति बन गए।
एसटीएफ और पुलिस की जांच में ये तथ्य सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने अब विकास दुबे और उसके सहयोगियों की चल अचल संपत्तियों का ब्यौरा मांगा है। जल्द ही ईडी की एक टीम कानपुर आकर मामले की जांच शुरू कर सकती है।
तीन दर्जन संपत्तियां, प्रत्येक की कीमत करोड़ों में
जय बाजपेई और इनके पारिवारिक सदस्यों के पास देश और विदेश में तीन दर्जन संपत्तियां होने की जानकारी मिली है। कानपुर व प्रदेश के प्रमुख शहरों, उत्तराखंड, मुंबई में 21 फ्लैट और 12 मकान हैं। इनमें ब्रह्मनगर में छह मकान, आर्यनगर में एक अपार्टमेंट में आठ फ्लैट और पनकी में एक ड्यूप्लेक्स कोठी शामिल है।
इसकी अनुमानित कीमत 30 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा 15 करोड़ रुपये कीमत का एक फ्लैट दुबई में और करीब 10 करोड़ रुपये का फ्लैट बैंकॉक में है। जानकारी ये भी आ रही है।
कि विकास ने बीते तीन वर्षों में 14 देशों की यात्राएं कीं और करोड़ों रुपये अपनी शान-ओ-शौकत में खर्च किए। हाल में उसने लखनऊ में एक घर खरीदा, जिसकी कीमत 20 करोड़ रुपये से अधिक है।
जय के खातों में लेनदेन के सबूत जुटाए
विकास दुबे और जय बाजपेई के बीच अक्सर लाखों रुपयों का लेनदेन होता था। इसके लिए खाते अलग अलग इस्तेमाल किए जाते थे।
पुलिस और एसटीएफ ने ईडी को देने के लिए अलग-अलग बैंकों से लेनदेन के सबूत जुटाए हैं। बताते हैं
कि जय का भारतीय स्टेट बैंक की रामकृष्ण नगर शाखा में खाता है। बीते एक वर्ष में इस खाते से करीब एक करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ।
करीब 60 लाख रुपये तो विकास ने खुद ही निकाले। यह रकम कहां से आती थी, किस काम में खपाई जाती थी। इसका कुछ पता नहीं।