‘व्यापम’ का बोझ होगा कम: यूपी-गुजरात की तर्ज पर MP में बनेगा ‘पुलिस भर्ती बोर्ड’, वित्त विभाग ने 95 पदों को दी मंजूरी

खत्म होगा भर्ती और रिजल्ट का इंतजार! MP में गठित हो रहा नया भर्ती बोर्ड, पुलिस से लेकर ट्रांसपोर्ट विभाग तक की परीक्षाएं होंगी तेज

‘व्यापम’ का बोझ होगा कम: यूपी-गुजरात की तर्ज पर MP में बनेगा ‘पुलिस भर्ती बोर्ड’, वित्त विभाग ने 95 पदों को दी मंजूरी

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक सुधार करने जा रही है। गृह विभाग ने राज्य में ‘पुलिस भर्ती बोर्ड’ के गठन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को आगामी जुलाई महीने में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

प्रस्ताव के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श पूरा हो चुका है। हालांकि, गृह विभाग ने इस नए बोर्ड के सुचारू संचालन के लिए 200 पदों की मांग की थी, लेकिन वित्त विभाग ने फिलहाल वित्तीय प्राथमिकताओं को देखते हुए 95 पदों की ही मंजूरी दी है।

सावन 2026 में बड़ा खगोलीय उलटफेर: महज 16 दिनों में लगेंगे दो बड़े ग्रहण, रक्षाबंधन पर भी चंद्र ग्रहण का साया;  ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें?

एक ही बोर्ड करेगा सभी ‘वर्दीधारी’ भर्तियां

अब तक अलग-अलग विभागों की वर्दीधारी भर्तियों के लिए युवाओं को अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, लेकिन नया बोर्ड इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा। ‘व्यापम’ का बोझ होगा कम: यूपी-गुजरात की तर्ज पर MP में बनेगा ‘पुलिस भर्ती बोर्ड’, वित्त विभाग ने 95 पदों को दी मंजूरी

ESB (कर्मचारी चयन मंडल) का बोझ होगा कम

वर्तमान में प्रदेश की अधिकांश सरकारी भर्तियों का जिम्मा कर्मचारी चयन मंडल (ESB/व्यापम) पर है, जिससे परीक्षाओं में देरी और परिणामों को लेकर दबाव बना रहता है।

समय पर आएंगे परिणाम: नया भर्ती बोर्ड सीधे ESB के समानांतर (Parallel) काम करेगा। इससे ESB पर से परीक्षाओं का अतिरिक्त बोझ हटेगा, जिससे अन्य विभागों की परीक्षाएं और उनके परिणाम भी समय पर जारी हो सकेंगे। साथ ही पुलिस विभाग को अपनी भर्ती के लिए अलग से मैनपावर और संसाधन नहीं लगाने पड़ेंगे।

यूपी और गुजरात की तर्ज पर एमपी में ‘सुपर मॉडल’

मध्य प्रदेश ऐसा बोर्ड बनाने वाला देश का पहला राज्य नहीं है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश और गुजरात में ‘पुलिस भर्ती बोर्ड’ पहले से ही बेहद सफल तरीके से काम कर रहे हैं। एमपी सरकार भी इसी सफल मॉडल को अपनाने जा रही है ताकि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे और पेपर लीक या लेटलतीफी जैसी समस्याओं पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

जुलाई में कैबिनेट की मुहर लगते ही इस बोर्ड के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह फैसला प्रदेश के उन लाखों युवाओं के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा जो लंबे समय से पुलिस, वन विभाग और जेल प्रहरी जैसी वर्दीधारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं।

Exit mobile version