India’s First Hydrogen Train Trial: भारतीय रेलवे का इतिहास- 120 KM/H की रफ्तार से दौड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन; अगले महीने से शुरू होगी सेवा
India's First Hydrogen Train Trial: भारतीय रेलवे का इतिहास- 120 KM/H की रफ्तार से दौड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन; अगले महीने से शुरू होगी सेवा
India’s First Hydrogen Train Trial: भारतीय रेलवे का इतिहास- 120 KM/H की रफ्तार से दौड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन; अगले महीने से शुरू होगी सेवा
नेशनल डेस्क: भारतीय रेल को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त और ‘नेट जीरो कार्बन’ बनाने की दिशा में आज देश को एक ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन (Hydrogen-Powered Train) का आज दिल्ली-जींद रेल सेक्शन पर फाइनल हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
इस महत्वपूर्ण परीक्षण के दौरान नीले रंग की यह अत्याधुनिक ट्रेन 120 किलोमीटर प्रति घंटे (120 kmph) की तूफानी रफ्तार से पटरियों पर दौड़ी। इस सफल ट्रायल के बाद अब इसे जल्द ही कमर्शियल सर्विस (व्यावसायिक परिचालन) के लिए हरी झंडी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
RDSO की निगरानी में हुआ परीक्षण; परखे गए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स
भारतीय रेलवे के अनुसार, यह पूरा फाइनल ट्रायल ‘रिसर्च डिजाइंस एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन’ (RDSO) की उच्च स्तरीय टेक्निकल टीम की सीधी निगरानी में संपन्न हुआ। 120 किमी/घंटे की रफ्तार पर ट्रेन के भीतर और बाहर कई कड़े सुरक्षा मानकों को परखा गया:
ब्रेकिंग सिस्टम की जांच: हाई-स्पीड पर ट्रेन को रोकने और उसके सुरक्षा घेरे को देखा गया।
इंजन क्षमता और वाइब्रेशन: इंजन की वास्तविक लोड क्षमता, ट्रैक पर ट्रेन की स्थिरता (Stability) और तेज गति में होने वाले वाइब्रेशन (कंपन) लेवल की गहनता से तकनीकी जांच की गई।India’s First Hydrogen Train Trial: भारतीय रेलवे का इतिहास- 120 KM/H की रफ्तार से दौड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन; अगले महीने से शुरू होगी सेवा
पूरी तरह ग्रीन टेक्नोलॉजी; धुएं की जगह निकलेगी सिर्फ ‘भाप और पानी’
यह हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह से ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी’ पर आधारित है, जो भारत को ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में बड़ी मदद देगी।
फ्यूल सेल तकनीक (Fuel Cell Technology): यह ट्रेन डीजल या पारंपरिक बिजली से नहीं, बल्कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल पर काम करती है। इसमें हाइड्रोजन गैस, हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ रासायनिक क्रिया करके बिजली (Electricity) बनाती है, जिससे ट्रेन का प्रोपल्शन सिस्टम चलता है। शून्य प्रदूषण (Zero Pollution): इस पूरी प्रक्रिया के बाई-प्रोडक्ट के रूप में ट्रेन से साइलेंसर के जरिए कोई जहरीला धुआं या कार्बन नहीं निकलता, बल्कि सिर्फ शुद्ध पानी और भाप (Water and Steam) उत्सर्जित होती है। इससे वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण दोनों पूरी तरह शून्य (0%) हो जाते हैं।