स्वाति नक्षत्र 2026: 21 और 22 जुलाई को आसमान से बरसेगा ‘अमृत’? जानें बारिश के पानी का वो सच जो कोई नहीं बताता
ज्योतिष एवं धर्म डेस्क: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़/श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में स्वाति नक्षत्र की शुरुआत हो चुकी है। वैदिक ज्योतिष में स्वाति नक्षत्र को प्रगति, स्वतंत्रता और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, खरीदारी या नए व्यापार की शुरुआत करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
यदि आप भी इस शुभ अवधि में कोई नया काम शुरू करने जा रहे हैं, तो नक्षत्र के समय, राहुकाल और इससे जुड़ी प्राचीन मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानें।
स्वाति नक्षत्र का सही समय और अवधि
पंचांग के अनुसार पूरे भारत (मध्य प्रदेश सहित) में स्वाति नक्षत्र की अवधि इस प्रकार रहेगी: स्वाति नक्षत्र 2026: 21 और 22 जुलाई को आसमान से बरसेगा ‘अमृत’? जानें बारिश के पानी का वो सच जो कोई नहीं बताता
- शुरुआत (Start): मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को रात 08:49 बजे से।
- समाप्ति (End): बुधवार, 22 जुलाई 2026 को रात 11:03 बजे तक।
- विशेष: 22 जुलाई (बुधवार) को पूरे दिन स्वाति नक्षत्र का प्रभाव बना रहेगा।
22 जुलाई 2026 (बुधवार) का पंचांग व शुभ-अशुभ मुहूर्त
| समय प्रकार | अवधि / समय |
| तिथि | शुक्ल पक्ष नवमी |
| शुभ योग | साध्य योग (शाम 06:40 PM तक) |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:39 AM से दोपहर 12:31 PM तक |
| राहुकाल (अशुभ समय) | दोपहर 12:05 PM से 01:46 PM तक (इस दौरान नया काम शुरू करने से बचें) |
स्वाति नक्षत्र का धार्मिक महत्व और विशेषताएं
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देवता और स्वामी ग्रह: स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता वायुदेव (पवन देव) हैं और इसके स्वामी राहु ग्रह माने जाते हैं।
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शुभ कार्यों के लिए अनुकूल: स्वाति एक ‘चर’ (चलायमान) नक्षत्र है। इस नक्षत्र में व्यापारिक समझौते, वाहन या प्रॉपर्टी की खरीदारी, विद्यारंभ और यात्राएं करना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है।
स्वाति नक्षत्र और वर्षा जल: क्या है पौराणिक मान्यता?
स्वाति नक्षत्र को लेकर भारतीय जनमानस और साहित्य में जल से जुड़ी कई अनोखी परंपराएं और कहावतें प्रचलित हैं: स्वाति नक्षत्र 2026: 21 और 22 जुलाई को आसमान से बरसेगा ‘अमृत’? जानें बारिश के पानी का वो सच जो कोई नहीं बताता
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‘स्वाति की बूंद’ का अनोखा चमत्कार: एक प्रसिद्ध पौराणिक उक्ति है—
“कदली, सीप, भुजंग मुख, स्वाति एक गुण तीन। जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन।”
मान्यता है कि स्वाति नक्षत्र में बरसने वाली बूंद अगर सीप पर पड़े तो मोती, केले के पत्ते पर पड़े तो कपूर, और सांप के मुंह में पड़े तो विष बन जाती है।
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आरोग्य और पवित्रता: प्राचीन लोक मान्यताओं के अनुसार, स्वाति नक्षत्र के दौरान होने वाली बारिश के जल को बहुत पवित्र और औषधीय गुणों से युक्त माना जाता था। पुराने समय में लोग इस जल को बीमारियों को दूर करने वाला मानकर सहेजते थे।
आधुनिक समय में सावधानी ज़रूरी
यद्यपि स्वाति नक्षत्र के जल का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व बहुत अधिक है, लेकिन वर्तमान में पर्यावरण और वायु प्रदूषण (Acid Rain) के कारण बारिश के पानी को सीधे पीना सेहत (पेट व त्वचा) के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
सलाह: यदि आप इस जल का प्रयोग धार्मिक आस्था के लिए करना चाहते हैं, तो इसे पूजन या छिड़काव के लिए सहेज सकते हैं। उपयोग में लाने से पहले इसे उबालकर और अच्छे से फ़िल्टर करके ही इस्तेमाल करें।
— पंचांग, ज्योतिष एवं धर्म डेस्क
