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Sri Lanka Blasts: 290 पहुंचा मृतकों का आंकड़ा, भारत ने अलर्ट किया था, फिर भी नहीं बच सका श्रीलंका

कोलंबो। भारत ने संभावित हमले के बारे में श्रीलंका को विशिष्ट खुफिया जानकारी दी थी। मगर, इसके बावजूद बी कोलंबो ने उन विस्फोटों को रोकने के लिए पर्याप्त सावधानी नहीं बरत सका और वहां हुए श्रंखलाबद्ध बम धमाकों में 290 से अधिक लोगों की मौत हो गई। हमले में करीब 450 से अधिक लोग घायल हैं। द्वीपीय देश में हुआ यह अब तक का सबके दर्दनाक और भयावाह आतंकी हमला है। एक दशक पहले लिट्टे को उखाड़ फेंकने के बाद से श्रीलंका में शांति बनी हुई थी।

प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने रविवार को स्वीकार किया कि उन्हें संभावित हमले के बारे में जानकारी थी, लेकिन इसे रोकने के लिए वे पर्याप्त कदम नहीं उठा सके। शीर्ष खुफिया सूत्रों के अनुसार, श्रीलंका के नेशनल तौहीद जमात के जहरान हासिम और उनके सहयोगियों ने आत्मघाती हमले को अंजाम देने की योजना बनाई थी। उन्होंने अपनी योजना को अमलीजामा पहनाने की योजना के तहत 16 अप्रैल को कट्टनकुडी के पास पामुनाई में एक विस्फोटक से लदी मोटरसाइकिल थी।

सूत्रों ने आगे कहा कि उन्होंने 22 अप्रैल को या उससे पहले हमले की योजना बनाई थी। उन्होंने कथित तौर पर आठ स्थानों को हमले के चुना था, जिसमें एक चर्च और एक होटल का चयन किया था, जहां बड़े पैमाने पर भारतीय पर्यटक आते हैं। नई दिल्ली ने 4 अप्रैल को कोलंबो के साथ यह खुफिया जानकारी साझा की थी।

सूचना पर कार्रवाई करते हुए, श्रीलंका के पुलिस प्रमुख पुजुत जयसुंदरा ने रविवार के हमले से 10 दिन पहले एक देशव्यापी चेतावनी दी थी। एक विदेशी खुफिया एजेंसी ने बताया था कि नेशनल तौहीद जमात अलर्ट पर आत्मघाती हमले करने की योजना बना रहा है, जिसमें प्रमुख चर्चों के साथ-साथ कोलंबो में भारतीय उच्चायोग को भी निशाना बनाया जा सकता है।

हमले के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्हें यह पता लगाने के लिए सहायता की जरूरत होगी कि क्या इन हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों को विदेशों से मदद मिली। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब तक मिली जानकारी के अनुसार हमलावर संदिग्ध स्थानीय युवक हैं। उन्होंने बताया कि इन हमलों के मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विक्रमसिंघे ने कहा कि पुलिस जल्द ही हमलावरों के नाम जारी करेगी।

इस दौरान, श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने हमले के कारणों और परिणामों पर गौर करने के लिए एक विशेष जांच समिति नियुक्त की है। राष्ट्रपति सचिवालय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों का पैनल इस मामले को देखेगा। पैनल को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

देश में बढ़ा है धार्मिक तनाव

यूं तो लिट्टे को उखाड़ फेंकने के बाद से श्रीलंका में बीते एक दशक से शांति बनी हुई थी। मगर, हाल के वर्षों में वहां धार्मिक तनाव बढ़ा है। देश में करीब 70 फीसद आबादी बौद्ध धर्म को मानने वाली है। यहां 13 फीसद हिंदू, 10 फीसद मुस्लिम हैं और सात फीसद ईसाई हैं। बीते कुछ सालों में यहां अल्पसंख्यक ईसाई लगातार निशाने पर आ रहे हैं और इन पर हमले भी बढ़े हैं।

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