SRFTI छात्र आंदोलन: नसीरुद्दीन शाह के बयान पर छिड़ा राजनीतिक घमासान, बीजेपी का तीखा पलटवार
कोलकाता / नई दिल्ली: सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) के छात्रों के समर्थन में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के आने के बाद मामला अब राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। बीजेपी नेताओं ने शाह के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन पर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने और राजनीतिक दुर्भावना से काम करने का आरोप लगाया है।
क्या है SRFTI विवाद?
कोलकाता स्थित देश के प्रतिष्ठित फिल्म और टेलीविजन संस्थान SRFTI के परिसर में पिछले कुछ दिनों से छात्रों का विरोध प्रदर्शन चल रहा है। छात्रों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना परिसर में कार्यक्रम आयोजित किए गए और सुरक्षा के मुद्दों पर सवाल उठाने पर प्रशासन का रवैया उनके प्रति सख्त रहा। इस दौरान छात्रों को शो-कॉज नोटिस देने, हॉस्टल खाली कराने और कार्रवाई की खबरें सामने आईं, जिससे तनाव बढ़ता चला गया।SRFTI छात्र आंदोलन: नसीरुद्दीन शाह के बयान पर छिड़ा राजनीतिक घमासान, बीजेपी का तीखा पलटवार
नसीरुद्दीन शाह का बड़ा बयान: ‘भविष्य के फिल्म मेकर्स को डराने की कोशिश’
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक वीडियो संदेश में नसीरुद्दीन शाह ने खुलकर छात्रों का पक्ष लिया। शाह ने सत्ताधारी पक्ष, जवाबदेही मांगने वाले छात्रों को धमकियां दी जा रही हैं और उन्हें हॉस्टल खाली करने को कहा जा रहा है। अभिनेता ने आरोप लगाया कि प्रोपेगेंडा के जरिए देश के भावी फिल्म निर्माताओं को डराने या उनका माइंडवॉश करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने सभी जागरूक और बुद्धिजीवी नागरिकों से SRFTI के छात्रों की मांगों का खुलकर समर्थन करने की अपील की।
बीजेपी का पलटवार: ‘विदेशी पैसों और इशारों पर हो रही राजनीति’
नसीरुद्दीन शाह के इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने उन पर हमला बोल दिया:
राहुल सिन्हा (राज्यसभा सांसद, BJP): सिन्हा ने शाह की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘इतने समय से शांत रहने के बाद अचानक वे तभी क्यों जागे जब विदेश से कोई इशारा मिला?’ उन्होंने आरोप लगाया कि देश के खिलाफ बोलने वालों के खिलाफ सख्त संदेश दिया जाएगा।
रितेश तिवारी (विधायक, BJP): तिवारी ने नसीरुद्दीन शाह की विचारधारा को संघ और बीजेपी विरोधी बताया। उन्होंने अभिनेता के पारिवारिक संदर्भों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वे चुनिंदा मुद्दों पर ही अपनी चुप्पी तोड़ते हैं और विदेशी ताकतों के बहकावे में बयानबाजी कर रहे हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्र आंदोलनों की स्वायत्तता और कलाकारों की सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।














