कागजों पर गन खरीदना मना, पर दुकानों और ऑनलाइन धड़ल्ले से बिक रही ‘कार्बाइड गन’- प्रशासन बेखबर या मौन?
कटनी/जबलपुर (यशभारत वेब डेस्क)। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही मध्य प्रदेश में मासूमों और आम लोगों की आंखों की रोशनी छीनने वाली खतरनाक ‘कार्बाइड गन’ (पोटाश/पीवीसी पाइप गन) का अवैध बाजार एक बार फिर गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े निर्देशों के बाद प्रदेश भर के जिला प्रशासनों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर इसके निर्माण, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर कागजी प्रतिबंध जरूर लगा दिया है।
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि यह घातक हथियार स्थानीय दुकानों से लेकर ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर धड़ल्ले से बिक रहा है। कागजी आदेशों और जमीनी हकीकत के बीच का यह बड़ा अंतर गंभीर सवाल खड़े करता है।
‘PVC Monster Repeller’ के नाम से हो रही ऑनलाइन सप्लाई
स्थानीय स्तर पर पुलिस की छापेमारी की खबरों के बीच, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया साइट्स (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम व ई-कॉमर्स पोर्टल) अवैध विक्रेताओं के लिए सेफ हेवन बन चुके हैं:
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इन प्रतिबंधित गन को ‘PVC Monkey Repeller’ या बंदर भगाने वाली गन के नाम से खुलेआम बेचा जा रहा है।महज ₹500 से ₹1500 की कीमत में ये गन आसानी से उपलब्ध हैं और होम डिलीवरी के जरिए सीधे घरों तक पहुंच रही हैं।
क्या जमीनी कार्रवाई महज खानापूर्ति?
कटनी, जबलपुर, ग्वालियर और भोपाल समेत राज्य के कई जिलों में पुलिस और राजस्व विभाग की टीमों ने कुछ कारखानों व दुकानों पर छापेमारी कर कार्रवाई की है। लेकिन मुख्य नेटवर्क और ऑनलाइन सप्लाई चेन अब भी बेखौफ काम कर रही है:
स्थानीय स्तर पर हार्डवेयर और वेल्डिंग दुकानों में ऑर्डर पर यह पाइप गन तैयार की जा रही हैं। जब तक पुलिस एक दुकान पर कार्रवाई करती है, तब तक ऑनलाइन डिलीवरी के जरिए सैकड़ों गन बच्चों और युवाओं के हाथों तक पहुंच चुकी होती हैं।
क्यों खतरनाक है कार्बाइड गन?
कैल्शियम कार्बाइड और पानी के मिलने से अत्यधिक ज्वलनशील एसिटिलीन गैस (Acetylene Gas) बनती है।स्पार्क होते ही पाइप में भीषण धमाका होता है, जिससे प्लास्टिक और लोहे के कण सीधे चेहरे व आंखों में लगते हैं। पिछले वर्षों में प्रदेश में सैकड़ों बच्चों के कॉर्निया डैमेज होने और दृष्टि खोने के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
बड़े सवाल: क्यों बेबस दिख रहा तंत्र?
ऑनलाइन कंपनियों और सोशल मीडिया पेज पर धड़ल्ले से बिक रही कार्बाइड गन को साइबर सेल तुरंत बैन या टेक-डाउन क्यों नहीं करवा पा रही? कूरियर और ई-कॉमर्स डिलीवरी नेटवर्क के जरिए शहरों में आ रहे इन संदेहास्पद पार्सलों की चेकिंग क्यों नहीं हो रही?
यदि समय रहते ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री के इस सिंडिकेट पर कठोर नकेल नहीं कसी गई, तो इस बार भी दिवाली की खुशियां कई परिवारों के लिए अंधेरे में बदल सकती हैं।











