लोकायुक्त पुलिस का ‘रिवर्स’ स्ट्राइक! घूसखोरों को बचाकर पलटने वाले 21 फरियादी अब खुद बनेंगे आरोपी; पहली बार कोर्ट में दायर हुआ इस्तगासा
लोकायुक्त पुलिस का ‘रिवर्स’ स्ट्राइक! घूसखोरों को बचाकर पलटने वाले 21 फरियादी अब खुद बनेंगे आरोपी; पहली बार कोर्ट में दायर हुआ इस्तगासाए भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में अब तक केवल घूस लेने वाले सलाखों के पीछे जाते थे, लेकिन अब खेल बदलने वाला है। लोकायुक्त पुलिस ने एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उन 21 शिकायतकर्ताओं (फरियादियों) की सूची तैयार की है, जो रिश्वतखोरों को रंगे हाथों पकड़वाने के बाद कोर्ट में अपने बयानों से मुकर गए। अब ये फरियादी खुद कोर्ट के कठघरे में खड़े होंगे।
लोकायुक्त पुलिस का ‘रिवर्स’ स्ट्राइक! घूसखोरों को बचाकर पलटने वाले 21 फरियादी अब खुद बनेंगे आरोपी; पहली बार कोर्ट में दायर हुआ इस्तगासा
सेटलमेंट का खेल खत्म: समझौते की वजह से गिर रहे थे केस
अक्सर देखा जाता है कि ट्रैप के समय फरियादी पुलिस के साथ मजबूती से खड़ा रहता है, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही शुरू होते ही वह ‘पक्षद्रोही’ (Hostile) हो जाता है।
-
लालच और दबाव: आरोपी अफसर या कर्मचारी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर फरियादी को या तो डरा देते हैं या फिर पैसों का लालच देकर ‘सेटलमेंट’ कर लेते हैं।
-
मेहनत पर पानी: लोकायुक्त पुलिस की रिकॉर्डिंग, नोट जब्ती और पंचनामे जैसे पुख्ता सबूत होने के बावजूद फरियादी के मुकरने से केस कोर्ट में गिर जाता है।
इन बड़े नामों को बयानों ने दी थी ‘आजादी’
लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय द्वारा तैयार की गई सूची में कई ऐसे नाम हैं जो बयानों के पलटने से बरी हो गए थे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
-
पुलिस विभाग: ASI रामबहादूर पटेल, ASI बृजपालसिंह कुशवाह, प्रधान आरक्षक संजय गोडाले।
-
अन्य अधिकारी: नगर तथा ग्राम निवेश के लिपिक तेजराम कंडारे, पशु चिकित्सक सतीश शाक्य, मनरेगा उपयंत्री मुकामसिंह डाबर और पटवारी दीवाकर त्रिवेदी।
कानूनी कार्रवाई: हो सकती है जेल
लोकायुक्त पुलिस ने बयानों से पलटने वाले इन 21 लोगों के खिलाफ धारा 383 (BNS) और 340-344 (IPC) के तहत इस्तगासा पेश किया है।
सजा का प्रावधान: झूठी गवाही देने और न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने के आरोप में 3 माह की जेल और भारी अर्थदंड का प्रावधान है।
लोकायुक्त एसपी का सख्त संदेश
एसपी डॉ. राजेश सहाय के अनुसार, “पक्षद्रोही होने से भ्रष्टाचार के आरोपितों को राहत मिल जाती है। फरियादी अपना काम निकल जाने के बाद समझौता कर लेते हैं, जो कानूनन गलत है। अब ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही तय होगी।”

