RBI Masterplan: 97 के करीब पहुंचे रुपये को बचाने के लिए RBI का महा-प्लान; ₹50 अरब डॉलर लाने के लिए चलेगा यह ‘ब्रह्मास्त्र’, जानें क्या होगा असर
मुंबई: RBI Masterplan: 97 के करीब पहुंचे रुपये को बचाने के लिए RBI का महा-प्लान; ₹50 अरब डॉलर लाने के लिए चलेगा यह ‘ब्रह्मास्त्र’, जानें क्या होगा असर। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गोते लगा रहे भारतीय रुपये को वेंटिलेटर से बाहर निकालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा ‘मास्टरप्लान’ तैयार कर लिया है। वैश्विक तनाव के बीच रुपया इतिहास के सबसे न्यूनतम स्तर (97 के करीब) पर पहुंच चुका है, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
RBI Masterplan: 97 के करीब पहुंचे रुपये को बचाने के लिए RBI का महा-प्लान; ₹50 अरब डॉलर लाने के लिए चलेगा यह ‘ब्रह्मास्त्र’, जानें क्या होगा असर
हालात की गंभीरता को देखते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा सहित शीर्ष अधिकारियों ने कई दौर की आंतरिक बैठकें की हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू (Fundamentals) बेहद मजबूत हैं, इसलिए रुपये को और गिरने से रोकने के लिए अब कुछ कड़े और बड़े नीतिगत कदम उठाए जाएंगे।
रुपये को मजबूत करने के लिए RBI के 4 बड़े ‘दांव’ (Action Plan):
1. NRI डिपॉजिट स्कीम का ‘ब्रह्मास्त्र’ (अनुमानित $50 अरब का निवेश)
विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को अचानक से बूस्ट देने के लिए आरबीआई अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए एक बेहद आकर्षक और विशेष जमा योजना (Deposit Scheme) लॉन्च करने की तैयारी में है।
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2013 का इतिहास दोहराने की तैयारी: साल 2013 के ‘टेपर टैंट्रम’ संकट के समय भी भारत ने यही कदम उठाकर करीब 30 अरब डॉलर जुटाए थे। इस बार आरबीआई को उम्मीद है कि नई स्कीम से देश में 50 अरब डॉलर तक की भारी-भरकम विदेशी मुद्रा आ सकती है, जिससे बाजार में डॉलर की बाढ़ आ जाएगी और रुपया मजबूत होगा।
2. ब्याज दरों (Interest Rates) में बढ़ोतरी का संकेत
आगामी 3 से 5 जून, 2026 को आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस साल अब तक बेंचमार्क रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Rate Hike) का फैसला ले सकता है। ब्याज दरें बढ़ने से विदेशी निवेशकों को भारत में ज्यादा रिटर्न मिलेगा, जिससे डॉलर का प्रवाह भारत की तरफ मुड़ेगा।
3. सॉवरेन डॉलर बॉन्ड (Sovereign Dollar Bonds)
आरबीआई और केंद्र सरकार मिलकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सीधे डॉलर जुटाने के लिए सॉवरेन डॉलर बॉन्ड जारी करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर फंड जुटाने का यह सबसे सुरक्षित और प्रामाणिक तरीका माना जाता है, जिससे भारतीय करेंसी को तुरंत एक मजबूत बैकअप मिल जाएगा।
4. डॉलर स्वैप नीलामी (Dollar Swap Auction) का आगाज
बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी (नकदी) को नियंत्रित रखने और डॉलर की कमी को दूर करने के लिए आरबीआई ने बुधवार को ही 5 अरब डॉलर की स्वैप नीलामी का सफल एलान किया है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार को स्थिर रखने के लिए ऐसी कई और नीलामियां देखने को मिल सकती हैं।
विदेशी निवेशकों (FIIs) की होगी ‘घर वापसी’
दरअसल, अमेरिका और भारत के बीच ब्याज दरों का अंतर पिछले एक दशक के सबसे निचले स्तर पर आ गया था। इसी वजह से साल 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 19 अरब डॉलर निकाल लिए, जिससे रुपये पर भारी दबाव बना।
लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाएगा और भारतीय बॉन्ड मार्केट ज्यादा मुनाफा देने लगेगा, विदेशी निवेशक दोगुनी रफ्तार से भारतीय बाजार में वापसी करेंगे।

